पैलेट इंजरी केस में FIR के बाद राहुल गांधी का बड़ा आरोप, बोले- ‘अमित शाह की मंजूरी के बाद दर्ज हुई FIR’

20 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने आखिरकार FIR दर्ज कर ली है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे न्याय की दिशा में पहला कदम बताया, लेकिन FIR दर्ज होने में हुई देरी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर सवाल उठाए।
करीब 8 घंटे बाद दर्ज हुई FIR
राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल लोचब के साथ दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज करने में पुलिस ने काफी देरी की। राहुल के मुताबिक, वह सुबह करीब 11 बजे से पुलिस अधिकारियों के साथ मौजूद थे और शाम तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद FIR दर्ज की गई।
राहुल गांधी ने FIR की कॉपी दिखाते हुए कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने दावा किया कि अंतिम मंजूरी गृह सचिव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से मिलने के बाद ही FIR दर्ज की गई।
हालांकि, अमित शाह की मंजूरी के राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है। यह राहुल गांधी का आरोप है।
साहिल की चोट को लेकर राहुल का दावा
राहुल गांधी ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को करीब एक महीना हो चुका है और साहिल के शरीर में अभी भी पैलेट मौजूद हैं। उनके अनुसार, तीन पैलेट आंख में हैं, जिसके कारण उसकी दृष्टि प्रभावित हुई है, जबकि कुछ अन्य पैलेट दिल के पास बताए गए हैं।
राहुल ने इसे एक युवा व्यक्ति के साथ गंभीर अन्याय बताया और कहा कि अगर दिल्ली जैसे स्थान पर FIR दर्ज कराने में इतना समय लगता है तो छोटे शहरों और गांवों में आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
दिल्ली पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत FIR दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार, धारा 118 खतरनाक हथियार या साधन से जानबूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 125 किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी है।
पुलिस स्टेशन के बाहर राहुल का धरना
FIR दर्ज होने से पहले राहुल गांधी ने साहिल के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा भी धरने में शामिल हुईं। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी तैनात किए गए थे।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जा रही है और इसे संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
पूरा विवाद क्या है?
यह मामला 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। साहिल लोचब ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान उसे पैलेट गन से चोट लगी। इसी शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर राहुल गांधी शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे।
FIR दर्ज होने के बाद अब इस मामले में पुलिस जांच का रास्ता खुल गया है। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि साहिल को चोट कैसे लगी, पैलेट किस परिस्थिति में इस्तेमाल हुए और घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि FIR दर्ज होना न्याय की प्रक्रिया की शुरुआत है। साथ ही उन्होंने FIR में हुई देरी को लेकर सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करना चाहते थे, लेकिन ऊपर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया रुकी रही।
आगे क्या होगा?
अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करनी होगी। इसमें घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और कथित पैलेट इंजरी से जुड़े सबूत महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि छात्र को लगी चोटों के लिए कौन जिम्मेदार था और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किन परिस्थितियों में किया गया।
साहिल लोचब की शिकायत पर FIR दर्ज होने के बाद यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर औपचारिक पुलिस जांच के चरण में पहुंच गया है। राहुल गांधी ने FIR को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया है, जबकि उनके अमित शाह की मंजूरी संबंधी दावे को आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए। अब जांच के निष्कर्ष इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय करें
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