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Wednesday, October 14, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी संसद (US Capitol), रूस का तेल बैरल, भारत और चीन के झंडे तथा 100% टैरिफ का बड़ा ग्राफिक, जो रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध बिल और भारतीय तेल आयात पर संभावित प्रभाव को दर्शाता है।
US Senate में रूस पर नया प्रतिबंध बिल: भारत समेत शीर्ष 5 रूसी तेल खरीदार देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, ट्रंप के समर्थन के बाद बढ़ी वैश्विक हलचल।
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US Senate में रूस पर नया प्रतिबंध बिल पेश, भारत समेत शीर्ष 5 खरीदार देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

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अमेरिकी सीनेट में रूस के खिलाफ एक नया द्विदलीय (Bipartisan) प्रतिबंध विधेयक पेश किया गया है। इस बिल का उद्देश्य रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसके तेल-गैस से होने वाली आय को सीमित करना है। संशोधित विधेयक में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। पहले प्रस्तावित बिल में यह टैरिफ 500% तक था, जिसे अब काफी कम कर दिया गया है।

500% से घटाकर 100% किया गया टैरिफ

यह बिल मूल रूप से 2025 में Sanctioning Russia Act के रूप में पेश किया गया था। नए संस्करण में तीसरे देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को नरम किया गया है। अब यह अधिकतम 100% होगा और केवल रूस के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदार देशों पर लागू होगा।

किन देशों पर पड़ेगा असर?

बिल के अनुसार रूस के कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार देशों में शामिल हैं:

  • भारत
  • चीन
  • स्लोवाकिया
  • हंगरी
  • अजरबैजान

इन्हीं देशों पर आवश्यकता पड़ने पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है।

यूरोपीय देशों को राहत

संशोधित विधेयक में प्राकृतिक गैस आयात करने वाले कई यूरोपीय देशों के लिए छूट का प्रावधान भी रखा गया है। यदि कोई देश रूस से अपनी कुल प्राकृतिक गैस का 15% से कम आयात करता है और लगातार उस पर निर्भरता घटा रहा है, तो उसे टैरिफ से बाहर रखा जा सकता है।

रूस के ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्र पर भी सख्ती

बिल में केवल टैरिफ ही नहीं बल्कि रूस के खिलाफ कई अन्य कड़े कदम भी शामिल हैं, जिनमें—

  • रूस के ऊर्जा, रक्षा और वित्तीय क्षेत्र पर ब्लॉकिंग सैंक्शंस
  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाना
  • रूसी ओलिगार्क्स और प्रमुख कारोबारी समूहों पर कार्रवाई
  • रूस की ऊर्जा परियोजनाओं और शैडो टैंकर नेटवर्क पर प्रतिबंध

जैसे प्रावधान शामिल हैं।

राष्ट्रपति को मिलेगा वेवर देने का अधिकार

बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में कुछ मामलों में प्रतिबंधों या टैरिफ से छूट (Waiver) देने का अधिकार भी दिया गया है। हालांकि यह अधिकार सीमित शर्तों के तहत ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में रियायती कच्चा तेल खरीदता रहा है, जिससे घरेलू रिफाइनरियों को लागत में लाभ मिला है। यदि यह विधेयक भविष्य में कानून का रूप लेता है और भारत पर 100% टैरिफ लागू किया जाता है, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि राष्ट्रपति के वेवर प्रावधान और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया के कारण अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

अभी कानून नहीं बना है

फिलहाल यह केवल अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया विधेयक है। इसे कानून बनने से पहले सीनेट और प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से पारित होना होगा और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी। इसलिए इसका तत्काल प्रभाव लागू नहीं हुआ है।

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