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Friday, October 16, 2026
राहुल गांधी और एमके स्टालिन, कांग्रेस-DMK गठबंधन में आई दरार के बीच जन्मदिन संदेश पर चर्चा
राहुल गांधी के जन्मदिन पर एमके स्टालिन का संदेश राजनीतिक हलकों में नई चर्चा का कारण बना।
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राहुल गांधी के जन्मदिन पर स्टालिन का बदला अंदाज, शुभकामना संदेश में दिखी कांग्रेस-DMK रिश्तों की दरार

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नई दिल्ली, 19 जून 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन पर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की शुभकामना ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। स्टालिन के इस साल के संदेश और पिछले साल की शुभकामना की तुलना से कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ी दूरी साफ दिखाई दे रही है।

पिछले साल की गर्मजोशी, इस साल की औपचारिकता

जून 2025 में एमके स्टालिन ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें “मेरा आदर्शों का भाई” बताया था। उन्होंने लिखा था कि दोनों नेता रक्त से नहीं बल्कि विचार, विजन और उद्देश्य से जुड़े हैं और एक बेहतर भारत की दिशा में साथ आगे बढ़ रहे हैं।

लेकिन जून 2026 में स्टालिन का संदेश पूरी तरह औपचारिक नजर आया। उन्होंने केवल राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना की। इस संदेश में न तो पहले जैसी आत्मीयता दिखी और न ही कोई भावनात्मक संदर्भ।

कांग्रेस-DMK गठबंधन में क्यों आई दरार?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में डीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस ने डीएमके से दूरी बनाते हुए अभिनेता विजय की पार्टी तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन कर लिया।

कांग्रेस ने TVK को सत्ता में हिस्सेदारी देने का भी संकेत दिया। इस फैसले से डीएमके नेतृत्व नाराज हो गया और उसने कांग्रेस पर राजनीतिक धोखा देने का आरोप लगाया। लगभग दो दशक पुराने कांग्रेस-DMK गठबंधन में इसी के बाद गंभीर दरार देखने को मिली।

राहुल गांधी का जवाब बना चर्चा का विषय

एमके स्टालिन की शुभकामना के जवाब में राहुल गांधी ने लिखा, “हम साथ मिलकर लड़ेंगे, जब तक जीत नहीं मिल जाती।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह संदेश डीएमके के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस दक्षिण भारत में डीएमके जैसे मजबूत सहयोगी को पूरी तरह खोना नहीं चाहती और INDIA गठबंधन को भी एकजुट बनाए रखने की चुनौती उसके सामने है।

रिश्तों में तनाव, लेकिन उम्मीद बाकी

डीएमके का आरोप है कि कांग्रेस ने TVK के साथ समझौता करने से पहले उसे भरोसे में नहीं लिया। चुनाव के बाद कांग्रेस के किसी बड़े नेता का स्टालिन से मुलाकात न करना भी डीएमके की नाराजगी की वजह बना।

हालांकि राहुल गांधी के जवाब ने यह संकेत जरूर दिया है कि दोनों दलों के बीच संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार दोनों दल फिर से करीब आ सकते हैं।

कांग्रेस-DMK रिश्तों में आई यह खटास INDIA गठबंधन के भीतर बढ़ती चुनौतियों और बदलते राजनीतिक समीकरणों की भी झलक दिखाती है।

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