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Friday, October 30, 2026
लोकसभा के नए राजनीतिक समीकरण पर आधारित ग्राफिक, जिसमें NDA की बढ़ती ताकत, विपक्षी दलों में बगावत और परिसीमन बिल को लेकर संसद का बदलता गणित दिखाया गया है।
TMC और UBT में बगावत के बाद बदला संसद का गणित, परिसीमन बिल के लिए NDA बहुमत के बेहद करीब।
Politics

विपक्षी दलों में बगावत से बदला संसद का गणित, परिसीमन बिल के लिए NDA बहुमत के करीब

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संसद में आगामी परिसीमन (Delimitation) और संविधान संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में उभरी बगावत ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति को पहले से कहीं अधिक मजबूत कर दिया है। माना जा रहा है कि अब एनडीए इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या के काफी करीब पहुंच चुका है।

TMC और UBT में बगावत से NDA को फायदा

सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। इनमें से कई सांसद केंद्र सरकार के प्रति नरम रुख अपना सकते हैं। वहीं महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आई हैं, जिससे एनडीए को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है।

इसके अलावा, डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी को भी इस पूरे राजनीतिक समीकरण में अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दल तटस्थ रहते हैं या समर्थन देते हैं तो सरकार की राह और आसान हो सकती है।

क्या कहता है लोकसभा का गणित?

लोकसभा में कुल 543 सदस्य हैं, हालांकि कुछ सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी संख्या थोड़ी कम है। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साथ-साथ कुल सदस्य संख्या के आधार पर दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

  • एनडीए के पास वर्तमान में लगभग 293 सांसद हैं।
  • टीएमसी के बागी सांसदों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 313 से 318 तक पहुंच सकती है।
  • अप्रैल 2026 में जब यह प्रस्ताव पहली बार लाया गया था, तब एनडीए को करीब 298 वोट मिले थे और बहुमत से काफी पीछे रह गया था।
  • मौजूदा परिस्थितियों में सरकार आवश्यक संख्या से केवल कुछ वोट दूर बताई जा रही है।

क्या है परिसीमन बिल?

प्रस्तावित संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए भी जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

हालांकि दक्षिण भारत के कई राज्यों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद सीटों के पुनर्वितरण से उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों की सीटें बढ़ाने का आश्वासन दिया है।

मानसून सत्र पर टिकी नजरें

सरकार आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक को दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस और कुछ दक्षिण भारतीय दल इसके विरोध में खुलकर सामने आ चुके हैं। ऐसे में संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों ने बिना किसी चुनाव के संसद में शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है और आने वाले हफ्तों में यह देश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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