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Friday, October 30, 2026
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की तस्वीरों के साथ राजनीतिक टकराव दर्शाता न्यूज ग्राफिक, बीच में शिवसेना के दो धड़ों के झंडे और संसद भवन की पृष्ठभूमि, शीर्षक: "उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) फिर टूट की कगार पर?"
स्थापना दिवस से पहले 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। उद्धव गुट इसे साजिश बता रहा है, जबकि शिंदे गुट की ताकत बढ़ती दिख रही है।
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उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में फिर बगावत के संकेत, 6 सांसद शिंदे गुट के संपर्क में

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। शिवसेना (UBT) के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले पार्टी के भीतर नई बगावत की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ये सांसद अलग संसदीय समूह बनाने और शिंदे गुट में विलय की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंप चुके हैं। दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बाद इस राजनीतिक घटनाक्रम ने और गति पकड़ ली है।

किन सांसदों के नाम चर्चा में?

सूत्रों के मुताबिक जिन सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चा है, उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे नाईक निंबालकर, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।

वहीं अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे को अब भी उद्धव ठाकरे के करीबी और वफादार सांसद माना जा रहा है।

उद्धव गुट ने क्या कहा?

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने पार्टी टूटने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी एकजुट है और कुछ नेता व्यक्तिगत फैसले ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी रकम का लालच दिया जा रहा है।

उधर, उद्धव ठाकरे ने अपने निवास ‘मातोश्री’ पर वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। पार्टी ने सांसदों को संसदीय दल की बैठक में शामिल होने का निर्देश भी जारी किया है।

घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 14 जून: उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई, लेकिन अपेक्षा से कम सांसद पहुंचे।
  • 16 जून: कई सांसद दिल्ली पहुंचे और अलग समूह बनाने की चर्चा तेज हुई।
  • 17 जून: शिंदे गुट और संभावित बागी सांसदों के बीच बैठकों की खबरें सामने आईं।

क्यों बढ़ रहा है संकट?

2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। अब लोकसभा स्तर पर भी संख्या बल को लेकर नई लड़ाई शुरू होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ सांसदों की संख्या का नहीं, बल्कि शिवसेना की विरासत और संगठनात्मक पहचान का भी है।

आगे क्या होगा?

अगर आवश्यक संख्या बल के साथ अलग समूह को मान्यता मिलती है, तो इन सांसदों के लिए शिंदे गुट में शामिल होने का रास्ता आसान हो सकता है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मुकाबले की तैयारी कर रहा है।

शिवसेना की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने से पहले पार्टी एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट का सामना करती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सिर्फ अटकलें हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा सत्ता समीकरण बदलने वाला है। 19 जून के स्थापना दिवस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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