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Friday, November 6, 2026
नई दिल्ली में विकसित भारत सम्मेलन के दौरान झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों को लेकर केंद्र के सामने 3 प्रमुख मांगें रखीं
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नई दिल्ली में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उठाया राज्य के हितों का मुद्दा, केंद्र से मांगी 3 बड़ी राहत

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नई दिल्ली। भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के हितों और वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। 18 और 19 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हुए। अपने संबोधन में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर सहयोग देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्यों के मजबूत होने से ही देश के विकास की गति तेज हो सकती है।

सामाजिक स्थिति का आकलन जरूरी

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, विनिर्माण उत्पादन और वित्तीय आंकड़े विकास की पूरी तस्वीर नहीं बताते। विकसित भारत के लिए समाज की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का भी आकलन जरूरी है। उन्होंने आय में असमानता और गरीबी उन्मूलन को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए।

कृषि-ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने पर जोर

राधाकृष्ण किशोर ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी आबादी गांवों में रहती है और कृषि का एक बड़ा हिस्सा अब भी मानसून पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश को प्राथमिकता देने की बात कही।

20 से 22 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा

झारखंड के आर्थिक हालात का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने खनिज क्षेत्र में हुए संशोधनों और कर नीतियों के कारण राज्य के राजस्व पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा उठाया। हालांकि, उन्होंने झारखंड की वित्तीय स्थिति की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है। राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और पूंजीगत व्यय भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।

केंद्र के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

सम्मेलन में वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार के सामने झारखंड से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि—

  • खनन पर सेस लगाने का अधिकार राज्यों को फिर से दिया जाए।
  • जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाए।
  • जी-राम-जी योजना में 90:10 के वित्तीय अनुपात को बहाल किया जाए।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और अधिकार देना जरूरी है।

झारखंड का प्रतिनिधिमंडल भी रहा मौजूद

सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री के साथ वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चन्द्रभूषण प्रसाद, मंत्री के आप्त सचिव अनिरबान आईच और नरेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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