नितिन गडकरी का बड़ा बयान: ‘E-20 पर मेरे खिलाफ दुष्प्रचार, इसका मुझसे कोई संबंध नहीं’

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर चल रहे E-20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) विवाद और अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान बताते हुए कहा कि उनका E-20 नीति से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
इसी बीच, सोशल मीडिया पर वायरल डीपफेक वीडियो और पोस्ट के खिलाफ गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में 11 करोड़ रुपये के हर्जाने का मुकदमा भी दायर किया है। अदालत इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई करेगी।
‘यह जानबूझकर चलाया गया दुष्प्रचार अभियान’
नितिन गडकरी ने पिछले वर्ष दिए अपने बयान में कहा था,
“यह जानबूझकर चलाया गया दुष्प्रचार अभियान है। हमने एक ऐसे संगठन की पहचान की है, जो लोगों को फोन करके उनसे एक्स (X) पर पोस्ट लिखवा रहा है। संभव है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश हो। राजनीति में ऐसा होता रहता है।”
उन्होंने आगे कहा,
“अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 2001 में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत की थी। क्या उन्होंने यह मेरे कहने पर किया था?”
परिवार को लाभ पहुंचाने के आरोपों पर क्या बोले?
सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए गडकरी ने कहा कि उनके परिवार की कंपनियों को एथेनॉल से कोई विशेष लाभ नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा,
“हमारी कंपनियों को हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। कई लोगों ने इन्हें बंद करने की सलाह दी, लेकिन व्यक्तिगत लगाव के कारण ऐसा नहीं किया। हमारी यूनिट केवल 1.3 लाख लीटर एथेनॉल बनाती है, जो बेहद कम मात्रा है।”
‘देशहित और किसानों के लिए है एथेनॉल नीति’
गडकरी ने स्पष्ट किया कि वे एथेनॉल, इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी वैकल्पिक ऊर्जा तकनीकों का समर्थन इसलिए करते हैं ताकि:
- कच्चे तेल के आयात में कमी आए।
- प्रदूषण घटे।
- किसानों की आय बढ़े।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
- आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य पूरा हो।
उन्होंने कहा,
“अगर मैं इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन या फ्लेक्स इंजन वाली गाड़ियों को बढ़ावा देता हूं, तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं उनका निर्माण भी करता हूं?”
डीपफेक वीडियो पर हाई कोर्ट पहुंचे गडकरी
हाल ही में वायरल हुए AI आधारित डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में गडकरी को E-20 नीति का जिम्मेदार बताने पर उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में उन्होंने:
- Meta, X, Google समेत अन्य प्लेटफॉर्मों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
- 24 सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की मांग की है।
- 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
- कहा है कि इन पोस्टों से उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
विपक्ष भी उठा रहा है E-20 का मुद्दा
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत विपक्षी दल E-20 नीति की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी सरकार से एथेनॉल मिश्रण नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। वहीं सोशल मीडिया पर “गडकरी इज़ नेक्स्ट” और “E-20 जनता पार्टी” जैसे अभियान भी चर्चा में हैं।
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