About me

News Box Bharat
Welcome to News Box Bharat, your one-stop destination for comprehensive news coverage and insightful analysis. With a commitment to delivering reliable information and promoting responsible journalism, we strive to keep you informed about the latest happenings from across the nation and the world. In this rapidly evolving era, staying updated and making sense of the news is crucial, and we are here to simplify the process for you.

Recent Posts

+91 6205-216-893 info@newsboxbharat.com
Thursday, July 30, 2026
CrimeLatest Hindi NewsNews

AK-47 भारत में कब आई? क्या पुलिस इस हथियार का इस्तेमाल कर सकती है? जानिए पूरा इतिहास और नियम

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बल के जवान के हाथ में AK-47 राइफल का सांकेतिक दृश्य
AK-47 दुनिया की सबसे प्रसिद्ध असॉल्ट राइफलों में से एक है, जिसका इस्तेमाल विशेष सुरक्षा बलों और सैन्य अभियानों में किया जाता है।
Share the post

दुनिया की सबसे प्रसिद्ध असॉल्ट राइफलों में शामिल AK-47 (कलाश्निकोव) एक बार फिर चर्चा में है। बिहार के सिवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस जवान द्वारा AK-47 से कथित हवाई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद इस हथियार के इस्तेमाल और उससे जुड़े नियमों पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर AK-47 भारत में कब आई, इसका इस्तेमाल कौन कर सकता है और क्या सामान्य पुलिस बल इसे चला सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।

AK-47 क्या है?

AK-47 का पूरा नाम Avtomat Kalashnikova 1947 है। इसे सोवियत संघ के इंजीनियर मिखाइल कलाश्निकोव ने वर्ष 1947 में विकसित किया था। यह 7.62×39 मिमी कारतूस चलाने वाली एक ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफल है, जिसे उसकी मजबूती, विश्वसनीयता और आसान रखरखाव के लिए जाना जाता है।

आज दुनिया के कई देशों की सेनाएं, सुरक्षा बल और विशेष पुलिस इकाइयां इसके अलग-अलग संस्करणों का इस्तेमाल करती हैं।

भारत में AK-47 कब आई?

भारत में AK-47 का इस्तेमाल 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में बढ़ा, जब पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान तेज हुए। उस समय सेना और अर्धसैनिक बलों को आधुनिक असॉल्ट राइफलों की आवश्यकता थी।

बाद में भारत ने रूस से बड़ी संख्या में AK-47 और उसके आधुनिक संस्करण खरीदे। हाल के वर्षों में भारत में AK-203 राइफल के निर्माण की भी शुरुआत की गई है, जो उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित फैक्ट्री में रूस के सहयोग से बनाई जा रही है।

क्या पुलिस AK-47 का इस्तेमाल कर सकती है?

हाँ, लेकिन हर पुलिसकर्मी नहीं।

राज्य पुलिस के कुछ विशेष सशस्त्र बल, कमांडो यूनिट, एंटी-नक्सल फोर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), आतंकवाद-रोधी दस्ते और उच्च जोखिम वाले अभियानों में तैनात जवानों को AK-47 या अन्य असॉल्ट राइफलों से लैस किया जाता है।

सामान्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस अक्सर इंसास, कार्बाइन, सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR) या अन्य मानक हथियारों का उपयोग करती है। किसी भी हथियार के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट ऑपरेशनल प्रोटोकॉल और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश आवश्यक होते हैं।

सार्वजनिक जगह पर AK-47 से फायरिंग के क्या नियम हैं?

भारतीय पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए बल प्रयोग के स्पष्ट नियम होते हैं। गोली चलाना अंतिम विकल्प माना जाता है। यदि स्थिति में जान का तत्काल खतरा न हो तो पहले भीड़ नियंत्रण के अन्य उपाय अपनाए जाते हैं।

हवाई फायरिंग भी बिना उचित आदेश या परिस्थितियों के सामान्य रूप से स्वीकार्य नहीं मानी जाती। किसी भी फायरिंग की बाद में विभागीय और कानूनी जांच हो सकती है।

सिवान मामला क्यों बना विवाद?

बिहार के सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस जवान द्वारा AK-47 से कथित हवाई फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित जवान को ऐसी फायरिंग का आदेश नहीं था। अधिकारियों के अनुसार, उसे सार्वजनिक स्थान पर इस प्रकार हथियार का उपयोग नहीं करना चाहिए था। मामले की जांच के बाद संबंधित जवान को निलंबित कर दिया गया है।

AK-47 इतनी लोकप्रिय क्यों है?

  • कठिन मौसम में भी भरोसेमंद प्रदर्शन
  • कम रखरखाव में लंबे समय तक उपयोग
  • आसान संचालन
  • मजबूत निर्माण
  • दुनिया के कई देशों में व्यापक उपलब्धता

इन्हीं कारणों से AK-47 को दुनिया की सबसे सफल और सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली असॉल्ट राइफलों में गिना जाता है।

👉 यह भी पढ़ें:

Leave a Response