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Saturday, October 31, 2026
सिवान में नीट पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से घायल युवकों का अस्पताल में इलाज
नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान सिवान में गोली लगने से घायल तीन युवकों का इलाज पटना के मेदांता अस्पताल में किया गया।
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सिवान गोलीकांड: नीट पेपर लीक प्रदर्शन में घायल युवकों की दर्दभरी कहानी, पुलिस के दावों पर उठे सवाल

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नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन युवक हुए घायल

बिहार के सिवान में नीट पेपर लीक के विरोध में 25 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से तीन युवक घायल हो गए। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और फायरिंग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि केवल एक युवक को पुलिस की गोली लगी, जबकि बाकी दो के घायल होने की जांच जारी है। दूसरी ओर, तीनों घायलों का दावा है कि उन्हें पुलिस की गोली ही लगी थी।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद

प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक पुलिसकर्मी एके-47 राइफल से फायरिंग करता दिखाई दिया। वीडियो सामने आने के बाद बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए और एसआईटी में तैनात जवान अभिषेक पटेल को निलंबित कर दिया गया।

हालांकि, पुलिस और डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी घायल को एके-47 की गोली नहीं लगी। सिवान के एसपी पूरण झा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि एके-47 से चार राउंड फायरिंग हुई थी, लेकिन उससे कोई घायल नहीं हुआ।

पुलिस का दावा क्या है?

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कई राउंड फायरिंग की गई थी। इसमें बुलेट कुमार को पुलिस की गोली लगी, जबकि आकाश कुमार और एक नाबालिग अलग स्थान पर घायल हुए। पुलिस का कहना है कि दोनों अन्य मामलों की जांच जारी है।

घटना के दौरान:

  • आकाश कुमार और नाबालिग हाफिज चौक के पास घायल हुए।
  • बुलेट कुमार ट्रैफिक थाना क्षेत्र के पास घायल हुए।
  • तीनों को पहले सिवान सदर अस्पताल और बाद में पटना के मेदांता अस्पताल रेफर किया गया।
  • नाबालिग और आकाश कुमार को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि बुलेट कुमार का इलाज जारी है।

मंगेतर का जन्मदिन मनाने आए थे आकाश कुमार

22 वर्षीय आकाश कुमार उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले हैं। वह अपनी मंगेतर के साथ जन्मदिन मनाने बिहार आए थे।

आकाश के मुताबिक, वह केक लेने जा रहे थे। रास्ते में पत्थरबाजी शुरू होने पर वह किनारे खड़े हो गए। इसी दौरान उन्होंने देखा कि पुलिस एक युवक की पिटाई कर रही थी और तभी उनके बाएं कंधे में गोली लग गई।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी उनके हाथ में दर्द बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि गोली कंधे की बजाय सीने में लग जाती तो जान भी जा सकती थी। इस घटना के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी फोन कर उनका हालचाल जाना।

बीएसएफ भर्ती का सपना अधूरा पड़ने का डर

20 वर्षीय बुलेट कुमार गोंड सिवान के दरौली के रहने वाले हैं और बीएसएफ भर्ती की तैयारी कर रहे थे। परिवार के अनुसार वह नवंबर में होने वाली भर्ती परीक्षा के लिए आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने जा रहे थे, तभी रास्ते में गोली लग गई।

उन्हें पहले सिवान सदर अस्पताल और बाद में पटना के मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी दाहिनी टांग का ऑपरेशन किया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।

बुलेट कुमार के भाई धीरज कुमार गोंड का कहना है कि इस घटना ने उनके भाई का भविष्य खतरे में डाल दिया है।

उन्होंने कहा, “मेरा भाई दौड़-भाग वाली सरकारी भर्तियों की तैयारी करता था। पुलिस की गोली ने उसका पैर ही खराब कर दिया। अब उसका सपना टूट गया है। वह हर महीने करीब 5 हजार रुपये कमाकर घर चलाने में भी मदद करता था।”

परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था नाबालिग

घटना में घायल नाबालिग की कहानी भी बेहद मार्मिक है। उसके पिता का निधन हो चुका है और वह किराये के मकान में रहकर एक दुकान पर काम करता है। हर महीने करीब 5,000 रुपये की नौकरी से वह परिवार का खर्च चलाता था।

गोली उसके गले के पास लगी थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे अधिक बोलने से मना किया गया है। परिवार ने उसे आराम के लिए ननिहाल भेज दिया है।

नाबालिग के चचेरे भाई के मुताबिक, उसकी हालत अब पहले से बेहतर है, लेकिन डॉक्टरों ने पूरी तरह आराम की सलाह दी है।

अस्पताल ने क्या कहा?

पटना के मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक (एमडी) डॉ. रविशंकर सिंह ने बताया कि तीनों घायलों की हालत स्थिर है।

उनके अनुसार, किसी भी मरीज को गंभीर (मेजर) चोट नहीं आई थी। आकाश कुमार और नाबालिग को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि बुलेट कुमार का इलाज जारी है और उन्हें भी जल्द डिस्चार्ज किया जा सकता है।

बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने का फैसला किया

नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद पूरे बिहार में बड़ी संख्या में छात्रों का आंदोलन हुआ था।

मुख्य आंकड़े:

  • 407 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।
  • सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है।
  • आंदोलन के दौरान 19 छात्र और आम नागरिक घायल हुए।
  • 164 पुलिसकर्मी और सरकारी अधिकारी भी घायल हुए।
  • सिवान गोलीकांड में घायल युवकों के बयान के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच जारी, कई सवाल अब भी बाकी

सिवान गोलीकांड की जांच अभी जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस के अनुसार केवल एक व्यक्ति को उसकी गोली लगी, तो बाकी दो युवक कैसे घायल हुए। वहीं वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घायलों के आरोपों ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

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