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Saturday, October 31, 2026
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की फाइल फोटो।
सुप्रीम कोर्ट ने तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी।
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मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI की क्लोज़र रिपोर्ट स्वीकार

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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े बहुचर्चित तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को बंद करते हुए उनके खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। अदालत ने सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि विशेष अदालत के पास रिपोर्ट खारिज कर मामले में संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था। दिसंबर 2024 में डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद यह फैसला आया है, जिससे उन्हें इस आपराधिक मामले में औपचारिक रूप से राहत मिल गई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला ओडिशा के तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक के वर्ष 2005 में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ को आवंटन से जुड़ा है। उस समय कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास था।

साल 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख, डॉ. मनमोहन सिंह और अन्य आरोपियों को आपराधिक साजिश एवं भ्रष्टाचार के आरोपों में तलब किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि:

  • विशेष सीबीआई अदालत के पास क्लोज़र रिपोर्ट खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं था।
  • सीबीआई की दोनों क्लोज़र रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मामले में आगे कार्रवाई उचित नहीं थी।
  • इसलिए समन आदेश रद्द करते हुए क्लोज़र रिपोर्ट स्वीकार की जाती है और मामला समाप्त किया जाता है।

सीबीआई की जांच में क्या हुआ?

सीबीआई ने प्रारंभिक एफआईआर में कुमार मंगलम बिड़ला, पी.सी. पारख, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

बाद में जांच एजेंसी ने अदालत में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि अभियोजन चलाने योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। हालांकि विशेष अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया था और अतिरिक्त जांच के निर्देश दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसी क्लोज़र रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।

क्या था ‘कोयला घोटाला’?

साल 2012 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 1993 से 2010 के बीच कई कोयला ब्लॉकों का आवंटन बिना प्रतिस्पर्धी नीलामी के किया गया।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि इस प्रक्रिया से सरकार को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट के बाद देशभर में राजनीतिक विवाद शुरू हुआ और कई आवंटनों की जांच हुई।

इसके बाद वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2010 के बीच किए गए अधिकांश कोयला ब्लॉक आवंटनों को अवैध घोषित कर दिया था।

मनमोहन सिंह ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस (3 जनवरी 2014) में डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि उन्होंने स्वयं कोयला ब्लॉक और स्पेक्ट्रम आवंटन में पारदर्शिता तथा नीलामी की वकालत की थी।

उन्होंने उस समय कहा था कि “जब इतिहास लिखा जाएगा, हम बेदाग़ बाहर आएंगे।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि इतिहास उनके प्रति तत्कालीन राजनीतिक माहौल और मीडिया से अधिक उदार होगा।

फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे डॉ. मनमोहन सिंह की प्रतिष्ठा की बहाली बताया।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग की। वहीं कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस फैसले ने वर्षों पुराने आरोपों को गलत साबित कर दिया है।

फिलहाल इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला बंद किया।
  • सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट स्वीकार की गई।
  • विशेष अदालत द्वारा जारी समन आदेश रद्द।
  • मामला 2005 के तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था।
  • कांग्रेस ने फैसले के बाद प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग की

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