Jharkhand SIR 2026: अप्रैल में शुरू होगा मतदाता गहन पुनरीक्षण | 2003 वोटर लिस्ट बनेगा आधार

रांची। झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अप्रैल 2026 से शुरू किया जाएगा। चुनाव आयोग के निर्देश पर इसकी सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने जानकारी दी कि राज्य में यह गहन पुनरीक्षण एक ही चरण में संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि यह देश का नौवां एसआईआर होगा, इससे पहले आठ बार इस प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अप्रैल में राज्य में निवास करने वाले सभी मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। बीएलओ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। औपचारिक घोषणा के बाद घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा।
अब तक सैकड़ों कागजात फर्जी पाए गए
पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में चल रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने झारखंड के दस्तावेज प्रस्तुत कर मतदाता होने का दावा किया है। इन दस्तावेजों की जांच के दौरान अब तक सैकड़ों कागजात फर्जी पाए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को सर्वाधिक 2,769 आवेदन पश्चिम बंगाल से प्राप्त हुए, जिनमें से 316 आवेदनों के साथ संलग्न दस्तावेज अवैध पाए गए। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ से प्राप्त 106 आवेदनों में 14, गोवा से 69 में 12, मध्यप्रदेश से 25 में 2, गुजरात से 109 में 6, अंडमान से 58 में 3, राजस्थान से 25 में 6 और उत्तर प्रदेश से 44 में 9 आवेदन निरस्त किए गए हैं। इस तरह अब तक कुल 3,208 आवेदनों में से 368 आवेदन रद्द किए जा चुके हैं। रद्दीकरण का मुख्य कारण दस्तावेजों में पाई गई गड़बड़ियां हैं।
प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना
अप्रैल 2026 में होने वाले झारखंड के मतदाता गहन पुनरीक्षण का आधार वर्ष 2003 की मतदाता सूची होगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना, अपात्र व्यक्तियों को सूची से बाहर रखना तथा नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। के. रवि कुमार के अनुसार जिन लोगों का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें अपनी पात्रता सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिनका नाम उस सूची में नहीं है, वे अपने माता-पिता या परिवार के किसी ऐसे सदस्य के आधार पर पात्रता सिद्ध कर सकेंगे, जिनका नाम 2003 की सूची में दर्ज है। इसके अतिरिक्त, निर्धारित सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से भी प्रमाण प्रस्तुत किया जा सकेगा।
दस्तावेजों की शर्तें तय की गई हैं
जन्मतिथि के आधार पर भी दस्तावेजों की शर्तें तय की गई हैं। 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्तियों को अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थान का कोई वैध प्रमाण देना होगा। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थान के साथ-साथ माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज भी प्रस्तुत करना होगा। वहीं, 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्तियों को अपनी तथा अपने माता-पिता दोनों की जन्मतिथि और जन्मस्थान का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। चुनाव आयोग की तैयारियों के बीच यह स्पष्ट है कि अप्रैल से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के साथ ही झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना है।





