
देश की सबसे बड़ी अदालत Supreme Court of India ने तमिलनाडु की सियासत से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने Madras High Court के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें TVK विधायक R. Srinivas Sethupathi को फ्लोर टेस्ट में वोटिंग से रोका गया था।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और Vijay Bishnoi की बेंच ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश को “अत्यंत निंदनीय (Atrocious)” बताया।
कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए रिट याचिका नहीं, बल्कि चुनाव याचिका दायर करना ही सही तरीका है।
मामला क्या है?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में Tamilaga Vettri Kazhagam के उम्मीदवार श्रीनिवास सेतुपति ने शिवगंगा जिले की तिरुप्पत्तूर सीट से सिर्फ 1 वोट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
उन्होंने Dravida Munnetra Kazhagam के उम्मीदवार के.आर. पेरियाकरुप्पन को बेहद करीबी मुकाबले में हराया।
हार के बाद विपक्षी उम्मीदवार ने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट का आदेश
12 मई 2026 को मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए:
- सेतुपति को फ्लोर टेस्ट में वोटिंग से रोका
- विश्वास मत और अविश्वास प्रस्ताव में हिस्सा लेने पर रोक लगाई
- हालांकि चुनाव परिणाम को रद्द नहीं किया
इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:
- अनुच्छेद 226 के तहत याचिका इस मामले में सही नहीं
- चुनाव विवाद के लिए चुनाव याचिका ही उचित रास्ता
- हाईकोर्ट का आदेश “अत्याचारपूर्ण” और “अत्यंत निंदनीय”
साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी और दो हफ्ते में जवाब मांगा है।
फ्लोर टेस्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सेतुपति ने फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay द्वारा पेश विश्वास मत प्रस्ताव:
- 144 वोटों के साथ पास हुआ
- बहुमत का आंकड़ा: 118
बताया जा रहा है कि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam के कुछ बागी विधायकों के समर्थन से सरकार को मजबूती मिली।
अब इस मामले में अंतिम फैसला चुनाव याचिका के जरिए ही तय होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है।
सिर्फ 1 वोट से जीतने वाले विधायक को मिली यह राहत न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं और सही रास्ते को भी स्पष्ट करती है।





