BIG BREAKING: रांची में करोड़ों का वेतन घोटाला! सरकारी कर्मचारी ने उड़ाए 2.9 करोड़ रुपये

Kuber Portal घोटाला: पशुपालन संस्थान में 2 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी, रांची में लाखों नहीं, करोड़ों की निकासी का खुलासा ,सरकारी खजाने पर डाका, दो कर्मचारियों पर FIR
सेंट्रल डेस्क। झारखंड की राजधानी रांची से बड़ी खबर है। कांके स्थित Institute of Animal Health and Production में वेतन भुगतान से जुड़ा एक बड़ा अनियमितता का मामला सामने आया है। जिला कोषागार की जांच में करोड़ों रुपये की संदिग्ध निकासी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्यपालक दंडाधिकारी सदर, रांची की ओर से कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। बीएनएस की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। रांची के इस वेतन घोटाले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में वित्तीय निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। अब देखना होगा कि जांच आगे क्या मोड़ लेती है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।
क्या है पूरा मामला
उपायुक्त कार्यालय के निर्देश पर की गई जांच में पाया गया कि संस्थान के दो कर्मियों—
- मृणाल कुमार (लेखापाल)
- संजीव कुमार
ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान वेतन मद में निर्धारित राशि से कहीं अधिक रकम अपने-अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली।
कितनी राशि की गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- मृणाल कुमार के खाते में लगभग ₹1.52 करोड़ (1,52,43,572 रुपये)
- संजीव कुमार के खाते में लगभग ₹1.41 करोड़ (1,41,79,480 रुपये)
वेतन के नाम पर भेजे गए, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि:
- कुबेर पोर्टल के माध्यम से वेतन भुगतान में गड़बड़ी की गई
- मूल वेतन से छेड़छाड़ कर अधिक राशि निकाली गई
- यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की गई
जांच रिपोर्ट में इसे अनियमित और अवैध निकासी बताया गया है।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की
रांची के कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा थाना प्रभारी कोतवाली को निर्देश दिया गया है कि:
- दोनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए
- मामले की विस्तृत जांच कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
प्रशासन का संदेश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता पर असर
इस तरह के मामलों से सरकारी संस्थानों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सरकारी तंत्र में विश्वास कमजोर हो सकता है।





