यूपी में 26 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद? अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मर्जर के नाम पर 26,386 सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए गए, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालांकि, यह अखिलेश यादव का आरोप है और सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले अखिलेश यादव?
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार निजी स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूलों का विलय (मर्जर) कर रही है। उनका आरोप है कि इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित बच्चे ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय से हैं, जिनकी पढ़ाई सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहती है।
सरकारी स्कूलों को लेकर क्या हैं आंकड़े?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि यह आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित हैं।
- वर्ष 2017 में प्राइमरी स्कूलों की संख्या: 1,13,938
- वर्ष 2026 में प्राइमरी स्कूलों की संख्या: 87,552
- कुल घटे या बंद हुए स्कूल: 26,386
किन जिलों में सबसे ज्यादा स्कूल बंद होने का दावा?
सपा अध्यक्ष के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित जिले ये हैं—
- लखीमपुर खीरी – 758
- सीतापुर – 650
- प्रयागराज – 638
- गोरखपुर – 487
शिक्षकों की कमी को लेकर भी लगाए आरोप
अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है।
उनके अनुसार—
- कक्षा 1 से 8 तक 1.40 लाख शिक्षकों के स्वीकृत पद कम कर दिए गए।
- प्राइमरी स्कूलों में 62,465 शिक्षकों की संख्या घट गई।
- 81,821 शिक्षक पद खाली पड़े हैं।
- पिछले लगभग साढ़े नौ वर्षों में नई शिक्षक भर्ती नहीं हुई।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूल अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
- लगभग 7,000 स्कूलों में बिजली नहीं।
- करीब 23,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए सक्रिय शौचालय नहीं।
- 576 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं।
- लगभग 23,000 स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं।
नामांकन में भी बड़ी गिरावट का दावा
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों का नामांकन भी तेजी से घटा है।
उनके अनुसार—
- कुल नामांकन में 28.32 लाख की कमी आई।
- इनमें लगभग 16 लाख छात्राएं शामिल हैं।
निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने का आरोप
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों के मर्जर और बंद होने के साथ-साथ पिछले कुछ वर्षों में 3,440 निजी प्राइमरी स्कूल खोले गए। उनका कहना है कि सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजी संस्थानों को बढ़ावा दे रही है।
सरकार का पक्ष क्या है?
यह ध्यान देना जरूरी है कि ये सभी दावे समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोप हैं। राज्य सरकार पहले कई अवसरों पर स्पष्ट कर चुकी है कि स्कूलों को बंद नहीं किया गया, बल्कि कम नामांकन वाले विद्यालयों का मर्जर (विलय) किया गया है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
सरकार की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का मामला बता रहा है, वहीं सरकार पहले मर्जर को शिक्षा सुधार का हिस्सा बता चुकी है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और विधानसभा में होने वाली चर्चा पर नजर रहेगी।
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