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Saturday, October 31, 2026
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश के बाद ओमान से सुरक्षित लौटीं सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर भारतीय दूतावास और राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष की मदद से ओमान में फंसी प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी हुई।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर ओमान में फंसी सिमडेगा की बेटी प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी

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सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर कराई वापसी

रांची: ओमान (मस्कट) में फंसी झारखंड के सिमडेगा जिले की प्रवासी श्रमिक प्रीति कुजूर की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर ली गई है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश के बाद श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास (मस्कट) के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया पूरी की। प्रीति कुजूर 1 अगस्त 2026 को भारत के लिए रवाना हो चुकी हैं और 2 अगस्त को अपने घर झारखंड पहुंच जाएंगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर तुरंत हुई कार्रवाई

राज्य सरकार के अनुसार, सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने 23 जून 2026 को प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE), रांची और भारतीय दूतावास (मस्कट) को मामले की जानकारी भेजी। अगले ही दिन 24 जून को भारतीय दूतावास ने प्रीति कुजूर से संपर्क कर उनकी सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू की।

फर्जी एजेंट ने दुबई का झांसा देकर भेज दिया ओमान

जानकारी के अनुसार, सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के मरारोमा गंझूटोली निवासी रंतु कुजूर ने 19 जून 2026 को अपनी बहन प्रीति कुजूर के लिए मदद की अपील की थी।

बताया गया कि मार्च 2026 में एक एजेंट ने दुबई में ₹45,000 से ₹50,000 प्रति माह वेतन का लालच देकर उन्हें विदेश भेजा, लेकिन उन्हें ओमान भेज दिया गया। वहां उनसे केवल ₹23,000 से ₹25,000 प्रतिमाह पर काम कराया गया। जब उन्होंने भारत लौटने की इच्छा जताई तो कंपनी मालिक ने भारी रकम की मांग की। परिवार ने ₹1.92 लाख देने के बावजूद उनकी वापसी नहीं हो सकी।

बातचीत से कम हुई रकम, वापस मिले पासपोर्ट और दस्तावेज

कंपनी मालिक दो वर्ष का अनुबंध पूरा होने से पहले वापसी के लिए 950 ओमानी रियाल की मांग कर रहा था। राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर प्रीति कुजूर की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया और राशि में राहत दिलाने का अनुरोध किया।

लगातार बातचीत के बाद कंपनी मालिक 950 ओमानी रियाल की जगह 600 ओमानी रियाल लेने पर सहमत हो गया। राशि जमा होने के बाद प्रीति कुजूर का पासपोर्ट और अन्य सभी मूल दस्तावेज उन्हें वापस सौंप दिए गए, जिससे उनकी घर वापसी का रास्ता साफ हुआ।

प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

राज्य सरकार ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार देश और विदेश में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। किसी भी आपात स्थिति में राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष लगातार सहायता उपलब्ध करा रहा है ताकि जरूरतमंद श्रमिकों को समय पर मदद मिल सके।

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