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Tuesday, October 27, 2026
झारखंड के तपकारा गांव का 10–12 फीट गहरा प्राचीन कुआं, जिसे जामुन की लकड़ी से सुरक्षित किया गया है और जो सालभर मीठा पानी देता है।
तपकारा (खूंटी) का यह प्राचीन कुआं वर्षों से कभी नहीं सूखा और आज भी कई गांवों के लोगों को मीठा पानी उपलब्ध करा रहा है।
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झारखंड का अनोखा कुआं: सिर्फ 10–12 फीट गहरा, लेकिन कभी नहीं सूखता, कई गांवों की बुझाता है प्यास

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झारखंड के खूंटी जिले के तपकारा क्षेत्र के एक गांव में स्थित एक छोटा-सा कुआं आज भी लोगों के लिए किसी प्राकृतिक चमत्कार से कम नहीं है। महज 10 से 12 फीट गहरा यह कुआं सालभर मीठे और शुद्ध पानी से भरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और सूखे के मौसम में भी इस कुएं का जलस्तर कभी खत्म नहीं होता।

कई पीढ़ियों से गांव की जीवनरेखा

ग्रामीण बताते हैं कि इस कुएं का उपयोग वे कई वर्षों से करते आ रहे हैं। सिर्फ एक गांव ही नहीं, आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी कुएं से पानी भरते हैं। इसके बावजूद आज तक यह कुआं कभी सूखा नहीं है। यही वजह है कि लोग इसे प्रकृति का अनमोल उपहार मानते हैं।

मीठा और शुद्ध पानी इसकी सबसे बड़ी पहचान

इस कुएं की सबसे बड़ी खासियत इसका मीठा और स्वच्छ पानी है। ग्रामीणों का कहना है कि इसका पानी पीने में बेहद स्वादिष्ट लगता है और आज भी लोग इसे पूरी तरह प्राकृतिक पेयजल स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

जामुन की लकड़ी से किया गया है संरक्षण

इस कुएं को जामुन के पेड़ की लकड़ी से घेरा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जामुन की लकड़ी पानी में जल्दी सड़ती या खराब नहीं होती, इसलिए पुराने समय से इसी लकड़ी का उपयोग कुओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता रहा है। आज भी यह लकड़ी मजबूती से कुएं की संरचना को संभाले हुए है।

प्रकृति का अनोखा अजूबा

आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था के दौर में भी यह छोटा-सा कुआं लोगों की प्यास बुझा रहा है। गर्मियों में जब कई जलस्रोत सूख जाते हैं, तब भी इस कुएं में पानी की कमी नहीं होती। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक कुआं नहीं, बल्कि प्रकृति का ऐसा वरदान है जिसने वर्षों से उनके जीवन को सहारा दिया है।

मुख्य बातें

  • 📍 स्थान: तपकारा क्षेत्र, खूंटी, झारखंड
  • 💧 गहराई: लगभग 10–12 फीट
  • 🌞 भीषण गर्मी में भी कभी नहीं सूखता
  • 🥤 पानी बेहद मीठा और शुद्ध माना जाता है
  • 🌳 जामुन की लकड़ी से सुरक्षित किया गया है
  • 🏘️ आसपास के कई गांवों की प्यास बुझाता है

तपकारा का यह छोटा-सा कुआं इस बात का जीवंत उदाहरण है कि प्रकृति के अनमोल खजाने आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। यदि इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए, तो आने वाली पीढ़ियां भी इनका लाभ उठा सकेंगी।

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