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Saturday, November 7, 2026
रांची के सरला बिरला पब्लिक स्कूल में AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर आयोजित जिला स्तरीय संगोष्ठी में मौजूद शिक्षक, प्राचार्य और शिक्षाविद।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) के भविष्य और शिक्षा में इसके उपयोग पर चर्चा
Education

सरला बिरला पब्लिक स्कूल में AI पर मंथन, भविष्य की शिक्षा पर हुई चर्चा

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डेस्क। भविष्य की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) विषय पर जिला स्तरीय संगोष्ठी (DLD) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रांची के कई सीबीएसई स्कूलों के शिक्षक, प्राचार्य और शिक्षाविद शामिल हुए। संगोष्ठी में “एआई और सीटी की पढ़ाई और मूल्यांकन” तथा “एआई का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इन आधुनिक तकनीकों को कक्षा में कैसे बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकता है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे कौशलों से जोड़ना था, जिससे वे छात्रों में तार्किक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित कर सकें। साथ ही यह भी बताया गया कि तकनीक का सही और जिम्मेदार उपयोग शिक्षा को अधिक प्रभावी और भविष्य के अनुरूप बना सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके बाद विद्यालय के संगीत विभाग ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. एस. बी. दांडिन थे। मूल्यांकन समिति में जी.डी. गोयनका पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार, मनन विद्या स्कूल की प्राचार्या रेखा नायडू और सरला बिरला विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. बिस्वजीत करण शामिल थे।

संगोष्ठी में कुल 13 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए

विद्यालय की प्राचार्या मनीषा शर्मा ने कहा कि आज के समय में एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें छात्रों को बेहतर समस्या समाधानकर्ता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने में मदद करती हैं। मुख्य वक्ता प्रो. एस. बी. दांडिन ने छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया। संगोष्ठी में कुल 13 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें स्कूल शिक्षा में एआई और सीटी के उपयोग से जुड़े प्रयोगों और अनुभवों को साझा किया गया। करीब 35 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भविष्य में विभिन्न विषयों के साथ एआई का समावेश जरूरी होगा। वहीं डॉ. बिस्वजीत करण ने शिक्षा में नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को बनाए रखते हुए नई तकनीकों को अपनाने की बात कही। कार्यक्रम का समापन भविष्य की शिक्षा को और बेहतर बनाने के संकल्प के साथ हुआ। चयनित सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) भेजा जाएगा।

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