भोजपुर एनकाउंटर विवाद: 24 घंटे पहले पुलिस ने बताया था ‘मानसिक अस्वस्थ’, अगले दिन गोलीबारी में हुई भरत भूषण तिवारी की मौत

भोजपुर/पटना, 20 जून 2026: बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिस युवक को पुलिस ने एक दिन पहले ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बताते हुए इलाज की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी, उसी युवक को अगले ही दिन पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लग गई और बाद में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे बिहार में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन थे भरत भूषण तिवारी?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय माने जाते थे। कोविड काल में लोगों की मदद करने और बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को उठाने के कारण उनकी स्थानीय पहचान थी। उनके पिता बिहार पुलिस में ड्राइवर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
फेसबुक लाइव के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी ने हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और फेसबुक लाइव के जरिए सरकारी व्यवस्था, बाढ़ राहत कार्यों और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए थे। एक वीडियो में उन्होंने एक अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद पुलिस उनके घर पहुंची।
16 जून को भोजपुर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि भरत मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और उन्हें इलाज के लिए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेजने की प्रक्रिया चल रही है। उस दौरान सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह हथियार के साथ दिखाई दिए थे और परिवार के सदस्य उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे।
अगले दिन हुई पुलिस कार्रवाई
17 जून को भरत भूषण तिवारी फिर फेसबुक लाइव पर आए। लाइव के दौरान उन्होंने खुद को “क्रांतिकारी” बताया और दावा किया कि उन्हें जानबूझकर मानसिक रूप से बीमार साबित किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस और STF की टीम ने उन्हें घेर लिया।
पुलिस का दावा है कि भरत ने टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, उन्हें पैर में गोली मारने का प्रयास किया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। बाद में PMCH में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिवार ने लगाया फेक एनकाउंटर का आरोप
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। उनका दावा है कि पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया और यह पूरा मामला फेक एनकाउंटर का है।
घटना के बाद आरा-बक्सर हाईवे पर प्रदर्शन हुआ और कई जगहों पर तनाव की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड
विवाद बढ़ने के बाद शाहपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार मलकार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। भोजपुर पुलिस ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच की सिफारिश की है। जांच में बैलिस्टिक रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
CBI जांच की मांग तेज
विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की CBI जांच की मांग की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भी रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।
जांच पर टिकी निगाहें
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकारों से जुड़े बड़े सवालों का विषय बन गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की कार्रवाई आत्मरक्षा में थी या फिर प्रक्रिया में कहीं गंभीर चूक हुई।
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