
रांची। झारखंड स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता नंद लाल तिवारी (नामांकन संख्या-3270/1999) के खिलाफ एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता सुभाष करमाली ने आरोप लगाया है कि नंद लाल तिवारी लंबे समय से अधिवक्ता के रूप में सक्रिय प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं, लेकिन अपने अधिवक्ता और प्रैक्टिस लाइसेंस का उपयोग निजी हितों के लिए कर रहे हैं। शिकायत में बार काउंसिल से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, नंद लाल तिवारी कथित रूप से पूर्णकालिक रूप से अन्य व्यवसायों और संविदात्मक कार्यों में संलग्न हैं तथा नियमित रूप से न्यायालय में वकालत नहीं करते। इसके बावजूद वे अधिवक्ता की पहचान और प्रैक्टिस लाइसेंस का उपयोग विभिन्न सरकारी और निजी कार्यों में कर रहे हैं।
नाम का इस्तेमाल व्यक्तिगत रंजिश के चलते किया गया
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2020 के एक भूमि विवाद का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि उनके नाम का दुरुपयोग कर प्रेम कुमार तिवारी के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया है कि जिस भूमि को सरकारी ‘कैसर-ए-हिंद’ भूमि बताकर आरोप लगाए गए थे, बाद में वह दावा गलत साबित हुआ। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें बाद में जानकारी मिली कि उनके नाम का इस्तेमाल व्यक्तिगत रंजिश के चलते किया गया। शिकायत में नंद लाल तिवारी पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, लोगों को धमकाने, सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने तथा अधिवक्ता की पहचान का अनुचित लाभ उठाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही बार काउंसिल से उनके एलएलबी प्रमाणपत्र, प्रैक्टिसिंग स्टेटस और अन्य संबंधित अभिलेखों के सत्यापन की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो अधिवक्ता अधिनियम और बार काउंसिल के नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाए। शिकायत की प्रति झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी प्रेषित की गई है।
नोट: इस मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत में किए गए दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना शेष है।





