मां की मौत के बाद बेसहारा हुआ मासूम, इरफान अंसारी ने उठाई परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी
रांची. जामताड़ा जिले के बोरवा गांव में एक नवजात बच्चे की दर्दभरी कहानी ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को भावुक कर दिया। गर्भावस्था के दौरान मां की मौत के बाद मासूम के सामने पालन-पोषण और भविष्य का संकट खड़ा हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री ने बच्चे के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की।जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों को पता चला कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी गांव के रास्ते से गुजरने वाले हैं। इसके बाद ग्रामीण करीब सात घंटे तक उनके आने का इंतजार करते रहे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि मंत्री मासूम से मिलकर परिवार की मदद करेंगे।मंत्री के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें बच्चे की स्थिति से अवगत कराया और मासूम को उनकी गोद में सौंप दिया। बच्चे और परिवार की परिस्थिति देखकर डॉ. इरफान अंसारी भावुक हो गए। उन्होंने परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता भी दी और भरोसा दिलाया कि बच्चे के भविष्य को लेकर उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है।
पालन-पोषण से लेकर पढ़ाई तक की जिम्मेदारी उठाने का ऐलान
डॉ. इरफान अंसारी ने घोषणा की कि वह बच्चे की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए हरसंभव मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चा अभी बहुत छोटा है, इसलिए फिलहाल उसे परिवार के पास ही रखा जाएगा। उसके थोड़ा बड़ा होने पर उसे अपने साथ ले जाने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, बच्चे का नामकरण भी जल्द करने की बात कही।इस दौरान परिवार के सदस्य भावुक हो गए, वहीं ग्रामीणों ने मंत्री के इस कदम की सराहना की। ग्रामीणों का कहना था कि दुख की इस घड़ी में परिवार को सहारा मिलने से बच्चे के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।
पहले इंसान, फिर डॉक्टर और उसके बाद नेता हूं
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उनके लिए राजनीति केवल पद और सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “मैं पहले इंसान हूं, फिर डॉक्टर और उसके बाद नेता। जब किसी गरीब, बेसहारा या पीड़ित परिवार का दर्द सामने आता है, तो मैं खुद को उससे अलग नहीं रख पाता। जनता मेरी पूंजी है और लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही मेरी सबसे बड़ी संतुष्टि है।”उन्होंने आगे कहा कि बच्चे का भविष्य अब उनकी जिम्मेदारी है। वह उसे पढ़ाएंगे-लिखाएंगे और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे। उनका कहना था कि समाज के सक्षम लोगों को भी जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि कोई बच्चा गरीबी या विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने भविष्य से वंचित न रहे।बोरवा गांव की यह घटना मानवीय संवेदनशीलता और जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने की अहमियत को सामने लाती है। मंत्री की घोषणा से मासूम के परिवार और ग्रामीणों में उसके भविष्य को लेकर उम्मीद जगी है।प्रकाशन से पहले ध्यान दें: बच्चे को गोद लेने और उसकी कानूनी अभिरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि कर लें। फिलहाल खबर में इसे मंत्री की ओर से की गई घोषणा के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।






