
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026: भारत में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन) को बढ़ावा देने के बीच पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) के E20 पेट्रोल सप्लाई प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
भूटान सरकार का कहना है कि देश का मौजूदा फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, हिमालयी पहाड़ी भूभाग और अत्यधिक नमी वाला मौसम E20 ईंधन के सुरक्षित भंडारण और उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है।
भूटान ने E20 पेट्रोल क्यों ठुकराया?
1. पुराने अंडरग्राउंड फ्यूल टैंक
भूटान के अधिकांश पेट्रोल स्टोरेज टैंक कई वर्षों पुराने हैं और भूमिगत बने हुए हैं। ऐसे टैंकों में पानी रिसने (Seepage) का खतरा बना रहता है।
E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल हाइग्रोस्कोपिक (Hygroscopic) होता है, यानी यह वातावरण से नमी को तेजी से सोख लेता है। यदि टैंक में थोड़ी भी नमी पहुंच जाए तो:
- ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- इंजन में खराबी आने का खतरा बढ़ जाता है।
- टैंकों में जंग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
- ईंधन की परतें अलग (Phase Separation) हो सकती हैं।
2. पहाड़ी इलाकों में प्रदर्शन की चिंता
भूटान का अधिकांश क्षेत्र हिमालयी पहाड़ों में स्थित है, जहां वाहनों को लगातार चढ़ाई और कठिन सड़कों पर चलना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार E20 पेट्रोल की ऊर्जा घनत्व (Energy Density) सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। ऐसे में:
- माइलेज कम हो सकता है।
- कठिन पहाड़ी रास्तों पर इंजन प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
- लंबी दूरी की यात्रा में ईंधन दक्षता कम होने की आशंका रहती है।
3. अधिक नमी वाला मौसम
भूटान के कई फ्यूल डिपो अत्यधिक नमी वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
ऐसी परिस्थितियों में:
- टैंकों के अंदर कंडेंसेशन बढ़ सकता है।
- पानी और एथेनॉल मिलकर ईंधन की गुणवत्ता खराब कर सकते हैं।
- लंबे समय तक स्टोरेज में ईंधन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
भारत से क्या मांग की है भूटान ने?
भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि:
- जब तक संभव हो, कम या बिना एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए।
- भविष्य में यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाई जाती है तो पहले से जानकारी दी जाए।
- सुरक्षित और लीक-प्रूफ स्टोरेज व्यवस्था विकसित करने में सहयोग किया जाए।
भारत में E20 पेट्रोल की स्थिति
भारत सरकार चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। सरकार का कहना है कि इससे:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- किसानों को एथेनॉल उत्पादन से लाभ मिलेगा।
- कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कुछ वाहन मालिकों ने पुराने वाहनों में:
- माइलेज कम होने,
- मेंटेनेंस खर्च बढ़ने,
- इंजन पर अतिरिक्त प्रभाव
जैसी चिंताएं भी जताई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि E20 के बेहतर उपयोग के लिए वाहन और फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों का अनुकूल होना आवश्यक है।
फिलहाल भूटान कौन-सा ईंधन खरीद रहा है?
भूटान वर्तमान में भारत से कम एथेनॉल मिश्रण वाला या एक्सपोर्ट-ग्रेड पेट्रोल और डीजल खरीदता है। देश फिलहाल E20 पेट्रोल अपनाने के पक्ष में नहीं है।
क्या भूटान का फैसला भारत की E20 नीति पर सवाल है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की E20 नीति का विरोध नहीं, बल्कि भूटान की भौगोलिक और तकनीकी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय है।
हर देश का मौसम, सड़क व्यवस्था और फ्यूल स्टोरेज सिस्टम अलग होता है, इसलिए एक जैसी ईंधन नीति हर जगह समान रूप से लागू नहीं की जा सकती।
भूटान द्वारा E20 पेट्रोल सप्लाई प्रस्ताव को अस्वीकार करना यह दिखाता है कि वैकल्पिक ईंधन अपनाने से पहले स्थानीय परिस्थितियों, स्टोरेज क्षमता और वाहन तकनीक का मूल्यांकन बेहद जरूरी है। आने वाले समय में यदि भूटान अपने फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाता है, तो भविष्य में E20 पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
Q1. E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है।
Q2. भूटान ने E20 क्यों नहीं अपनाया?
पुराने फ्यूल टैंक, अधिक नमी, पहाड़ी भूभाग और स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों के कारण।
Q3. क्या भारत में E20 पेट्रोल उपलब्ध है?
हाँ, भारत में चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
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