झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटाई पूरी सुरक्षा, सरकारी वाहनों के विवाद के बाद लिया बड़ा फैसला

रांची | 4 जुलाई 2026: झारखंड की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी पूरी सरकारी सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया। उन्होंने सुरक्षा में तैनात 16 पुलिसकर्मियों और उनके लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों को लौटाते हुए केवल वित्त विभाग की ओर से आवंटित एक सरकारी वाहन अपने पास रखा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
मंत्री का कहना था कि उनके पास पहले से मौजूद तीन वाहनों में 16 सुरक्षाकर्मियों का समुचित आवागमन संभव नहीं था, इसलिए अतिरिक्त वाहन की आवश्यकता थी।
हालांकि, अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने के बजाय वित्त विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया। नोटिस में वर्ष 2022 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए एक वाहन वापस करने के निर्देश दिए गए।
इससे नाराज होकर 29 जून 2026 को मंत्री ने डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस करने का निर्णय लिया।
केवल एक सरकारी वाहन रखा
राधाकृष्ण किशोर ने सुरक्षा में लगे सभी 16 पुलिसकर्मियों और उनके वाहनों को वापस कर दिया है। फिलहाल उन्होंने केवल वित्त विभाग से आवंटित एक सरकारी वाहन अपने पास रखा है।
मंत्री ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में राधाकृष्ण किशोर ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह उनके, वित्त विभाग और पुलिस मुख्यालय के बीच का प्रशासनिक विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा,
“समय आने पर पूरी बात बताऊंगा। जनता और मतदाता पूछेंगे तो पूरे मामले का खुलासा करूंगा।”
उन्होंने अपने गृह क्षेत्र पलामू के नक्सल प्रभावित इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें सुरक्षा से ज्यादा ईश्वर पर भरोसा है।
“जब तक ऊपर वाले ने जिंदगी लिखी है, सुरक्षा घेरे में भी कुछ हो सकता है।”
सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं
4 जुलाई 2026 तक इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, मंत्री के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों और नौकरशाही में चर्चा तेज हो गई है।
क्या यह नाराजगी का संकेत है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग और विभागीय समन्वय से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार की प्रतिक्रिया और मंत्री के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।
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