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Friday, July 3, 2026
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अडानी ग्रुप और UAE की IHC ने ओडिशा में ₹1.08 लाख करोड़ के मेगा एल्युमीनियम प्रोजेक्ट पर किया MoU साइन, भारत के मेटल सेक्टर का सबसे बड़ा FDI

अडानी एंटरप्राइजेज और IHC द्वारा ओडिशा में ₹1.08 लाख करोड़ के मेगा एल्युमीनियम प्रोजेक्ट की प्रतिनिधि तस्वीर।
ओडिशा में अडानी-IHC के ₹1.08 लाख करोड़ के एल्युमीनियम प्रोजेक्ट से भारत के मेटल सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।
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भारत के मेटल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises Limited) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग (IRH), जो IHC ग्रुप की कंपनी है, ने ओडिशा सरकार के साथ करीब 11.5 अरब डॉलर (लगभग ₹1.08 लाख करोड़) के मेगा एल्युमीनियम प्रोजेक्ट के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह निवेश ओडिशा के इतिहास का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) माना जा रहा है। साथ ही यह भारत के मेटलर्जी सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा FDI भी होगा।

50:50 जॉइंट वेंचर में बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Adani Enterprises और IRH के बीच 50:50 जॉइंट वेंचर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य माइनिंग से लेकर वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों तक पूरी इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन तैयार करना है।

प्रोजेक्ट में क्या-क्या बनेगा?

इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कई बड़े औद्योगिक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे—

  • 4 मिलियन टन प्रति वर्ष (MMTPA) क्षमता की अल्यूमिना रिफाइनरी
  • 2 MMTPA क्षमता का एल्युमीनियम स्मेल्टर
  • 4,000 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट, जिसमें 400 मेगावाट ग्रीन एनर्जी शामिल होगी
  • 1 MMTPA क्षमता का डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क, जहां वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

कहां लगाया जाएगा प्लांट?

प्रोजेक्ट को दो प्रमुख जिलों में विकसित किया जाएगा।

  • रायगड़ा जिला: यहां सासुबाहु माली बॉक्साइट खदान के पास अल्यूमिना रिफाइनरी स्थापित होगी।
  • सुंदरगढ़ जिला: यहां एल्युमीनियम स्मेल्टर, डाउनस्ट्रीम यूनिट और पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे।

लॉजिस्टिक्स और निर्यात के लिए अडानी समूह के धामरा पोर्ट का उपयोग किया जाएगा।

दो चरणों में होगा निवेश

पूरे प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

  • पहला चरण: लगभग ₹66,000 करोड़ का निवेश
  • दूसरा चरण: लगभग ₹44,000 करोड़ का निवेश

सरकारी मंजूरियों और पर्यावरणीय स्वीकृतियों में करीब 12 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद पहले चरण का निर्माण लगभग 3 से 4 वर्षों में पूरा होने का अनुमान है।

53,500 से अधिक रोजगार के अवसर

इस परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान लगभग 53,500 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे ओडिशा के औद्योगिक विकास को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

भारत के एल्युमीनियम सेक्टर के लिए क्यों है गेम चेंजर?

भारत वर्तमान में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक है। वर्ष 2025 में देश का उत्पादन लगभग 4.2 मिलियन टन रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद भारत की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति एल्युमीनियम की खपत केवल 3.4 से 3.9 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 8 से 12 किलोग्राम के बीच है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश की कुल मांग 8.5 मिलियन टन और वर्ष 2047 तक 28 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।

ओडिशा क्यों चुना गया?

ओडिशा देश के कुल बॉक्साइट भंडार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रखता है। यही वजह है कि राज्य को एल्युमीनियम उद्योग के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जाता है।

खनिज संसाधनों की उपलब्धता, बिजली, परिवहन और बंदरगाह जैसी सुविधाएं इस परियोजना को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देंगी।

अडानी ग्रुप के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?

यह अडानी समूह का मेटल सेक्टर में दूसरा बड़ा निवेश है। इससे पहले समूह गुजरात में कॉपर स्मेल्टर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

इस नए निवेश के जरिए समूह अपनी औद्योगिक सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को भी विस्तार देना चाहता है।

वेदांता और हिंडाल्को को मिलेगी चुनौती

इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद देश की प्रमुख एल्युमीनियम कंपनियों वेदांता और हिंडाल्को को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने की संभावना है। इसके अलावा कई वैश्विक कंपनियां भी ओडिशा में भविष्य की परियोजनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल आगे क्या होगा?

2 जुलाई 2026 को MoU साइन होने के बाद अब भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और अन्य सरकारी अनुमतियों की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल परियोजना की अंतिम निर्माण समयसीमा और निवेश की विस्तृत प्रगति को लेकर आगे और आधिकारिक अपडेट आने बाकी हैं। ₹1.08 लाख करोड़ का यह निवेश केवल ओडिशा ही नहीं बल्कि पूरे भारत के औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो यह भारत को एल्युमीनियम उत्पादन, निर्यात, रोजगार और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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