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Wednesday, July 1, 2026
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में बड़ा बदलाव: जस्टिस पीएस नरसिम्हा बने नए सदस्य, जजों की नियुक्ति में निभाएंगे अहम भूमिका

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में बदलाव को दर्शाती ग्राफिक, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भवन, न्याय का प्रतीक तराजू, गैवल और कॉलेजियम में जस्टिस पीएस नरसिम्हा के नए सदस्य बनने का संकेत दिया गया है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के नए सदस्य बन गए हैं।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में 28 जून 2026 से एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पीएस नरसिम्हा अब कॉलेजियम के नए सदस्य बन गए हैं। यह बदलाव जस्टिस जेके माहेश्वरी के सेवानिवृत्त होने के बाद हुआ है। वरिष्ठता क्रम के अनुसार जस्टिस नरसिम्हा अब कॉलेजियम के पांचवें सदस्य हैं और 2 मई 2028 तक इस पद पर बने रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति, तबादले और पदोन्नति से जुड़े फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में किसी नए सदस्य का शामिल होना न्यायपालिका के लिए अहम माना जाता है।

वर्तमान सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (जून 2026)

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में ये पांच सदस्य शामिल हैं:

  • चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्य कांत
  • जस्टिस विक्रम नाथ
  • जस्टिस बीवी नागरत्ना
  • जस्टिस एमएम सुंदरेश
  • जस्टिस पीएस नरसिम्हा (नए सदस्य)

क्या होता है कॉलेजियम सिस्टम?

कॉलेजियम सिस्टम की शुरुआत 1993 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश देशभर के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति की सिफारिश करते हैं।

सरकार किसी सिफारिश को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकती है, लेकिन यदि कॉलेजियम उसी सिफारिश को दोबारा भेजता है तो परंपरागत रूप से उसे स्वीकार किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखना है।

कौन हैं जस्टिस पीएस नरसिम्हा?

जस्टिस पीएस नरसिम्हा का जन्म 3 मई 1963 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने निजाम कॉलेज से स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से वर्ष 1988 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।

उन्होंने हैदराबाद हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक वकालत की। वर्ष 2008 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। 2014 में वे भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने और कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की।

31 अगस्त 2021 को उन्हें बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वे संवैधानिक, प्रशासनिक और पर्यावरण कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

जस्टिस पीएस नरसिम्हा के कॉलेजियम में शामिल होने से आने वाले समय में जजों की नियुक्ति और तबादलों से जुड़े फैसलों पर उनका महत्वपूर्ण प्रभाव रहेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेजियम की संरचना में बदलाव न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और भविष्य की नियुक्तियों पर असर डाल सकता है।

वरिष्ठता क्रम के अनुसार जस्टिस नरसिम्हा भविष्य में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने के दावेदारों में भी शामिल माने जा रहे हैं।

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