उद्धव के करीबी सांसद ओमराजे निंबालकर का बड़ा बयान: ‘मैं बड़े धर्मसंकट में हूं’, शिंदे गुट में जाने के संकेत

मुंबई/धाराशिव, 19 जून 2026: शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के धाराशिव लोकसभा सांसद ओमराजे निंबालकर ने पार्टी में चल रही बगावत के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह इस समय “बड़े धर्मसंकट” से गुजर रहे हैं और उनका फैसला भावनात्मक रूप से गलत लेकिन राजनीतिक रूप से सही प्रतीत होता है।
मीडिया से बातचीत में ओमराजे निंबालकर ने कहा, “मैं इस समय एक बड़े धर्मसंकट में हूं। भावनात्मक रूप से सोचूं तो यह कदम गलत लगता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह सही है। मेरे सामने राजनीतिक अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।”
क्या है पूरा मामला?
शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के बगावत करने और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। इनमें ओमराजे निंबालकर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि उन्हें उद्धव ठाकरे का बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता रहा है।
हाल ही में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में व्हिप जारी होने के बावजूद ओमराजे शामिल नहीं हुए। इसके बाद उनके शिंदे गुट में जाने की अटकलें और तेज हो गईं।
क्यों छोड़ सकते हैं उद्धव का साथ?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। ओमराजे के पिता पवनराजे निंबालकर की 2006 में हुई हत्या का मामला भी चर्चा में है। इस केस में एक पूर्व मंत्री आरोपी हैं। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि शिंदे गुट ने उन्हें मामले में अनुकूल परिणाम का भरोसा दिया है।
हालांकि ओमराजे ने सार्वजनिक रूप से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने केवल इतना कहा है कि उनके सामने राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई थी।
ठाकरे गुट का पलटवार
बगावत की खबरों के बीच आदित्य ठाकरे ने सांसदों के रवैये को शर्मनाक बताया है। वहीं संजय राउत ने इसे पार्टी के साथ विश्वासघात करार दिया है। ठाकरे गुट ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर किसी भी अलग गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है।
कौन हैं ओमराजे निंबालकर?
ओमराजे निंबालकर धाराशिव से दो बार सांसद रह चुके हैं। उन्हें उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता है। 2022 में शिवसेना के विभाजन के दौरान भी वह उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े रहे थे। क्षेत्र में उनकी पहचान किसान नेता के रूप में भी है।
आगे क्या?
20 जून को होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल ओमराजे निंबालकर ने शिंदे गुट में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनका बयान महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है।
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