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Friday, October 16, 2026
आदिवासी समुदाय को संबोधित करते झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय के अधिकार और एकजुटता पर जोर दिया।
JHARKHAND NEWS

असम के चाय बागानों से उठी आदिवासी हक की आवाज | हेमंत बोले– अब लड़नी होगी कानूनी लड़ाई

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रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने असम के बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए वहां रहने वाले आदिवासी समुदाय की स्थिति और उनके अधिकारों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह सभा आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति और आदिवासी काउंसिल ऑफ असम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में रहने वाले गरीब, किसान, आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर लंबे समय से अत्याचार और शोषण की खबरें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां के लोग वर्षों से सामाजिक और राजनीतिक उतार-चढ़ाव का सामना करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा है।

आदिवासी समुदाय की मेहनत और श्रम पर टिका हुआ

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का चाय उद्योग यहां के आदिवासी समुदाय की मेहनत और श्रम पर टिका हुआ है। हजारों वर्षों से यह समुदाय चाय उद्योग का अभिन्न हिस्सा रहा है, लेकिन इसके बदले उन्हें जो मेहनताना मिलता है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग को अपनी जान तक कुर्बान करनी पड़ी।

आदिवासी पहचान के लिए लंबा आंदोलन चला

उन्होंने झारखंड के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी पहचान के लिए लंबा आंदोलन चला। लगभग 50 वर्षों तक चले इस संघर्ष के बाद जब कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला, तब दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन समेत कई क्रांतिकारी नेताओं ने अलग झारखंड राज्य की मांग को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि अलग राज्य का सपना उस समय एक बहुत बड़ा संकल्प था और इसकी शुरुआत धनबाद, जिसे कोयला नगरी कहा जाता है, से हुई थी। उस दौर में क्रांतिकारी नेता स्वर्गीय शक्ति नाथ महतो ने कहा था कि यह छोटी लड़ाई नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस संघर्ष की पहली पंक्ति के लोग शहीद होंगे, दूसरी पंक्ति के लोग जेल जाएंगे और तीसरी पंक्ति के लोग ही राज्य को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में यही हुआ—झारखंड राज्य के निर्माण के संघर्ष में कई वीर शहीद हुए, अनेक परिवारों ने कष्ट सहे और कई बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन संघर्ष कभी रुका नहीं।

एकजुट होकर बदलाव की राह पर आगे बढ़ें

उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद भी यह दुर्भाग्य रहा कि आदिवासी समाज आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से उतना मजबूत नहीं बन सका जितना होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अब आदिवासी समुदाय को उनके अधिकार दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय से भी आह्वान किया कि वे एकजुट होकर बदलाव की राह पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी लोगों को एक मंच और एक छत के नीचे आने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज को बौद्धिक रूप से मजबूत बनने और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की भी बात कही।

चट्टान की तरह एकजुट होना होगा

उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य और विडंबना की बात है कि हजारों वर्षों से असम में रहने के बावजूद आदिवासी समाज को आज भी पूर्ण रूप से आदिवासी का दर्जा नहीं मिल पाया है। एक बड़ा समुदाय आज भी अपने अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए सभी को चट्टान की तरह एकजुट होना होगा। देश में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग की स्थिति में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ शक्तियां आदिवासी समाज को आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से कमजोर बनाए रखने की कोशिश करती हैं और उन्हें सिर्फ मजदूर बनाकर रखना चाहती हैं। ऐसे प्रयासों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि असम प्राकृतिक सुंदरता और खूबसूरत वादियों से भरा हुआ राज्य है। यहां पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनका लाभ स्थानीय समुदाय को भी मिलना चाहिए।

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