16 जनवरी को राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा
रांची। राज्य में इस बार नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएंगे। खास बात यह है कि मतदाताओं को पार्षद और मेयर (या अध्यक्ष) दोनों पदों के लिए वोट एक ही बैलेट बॉक्स में डालना होगा। हालांकि, दोनों पदों के लिए अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे मतदान और गिनती की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर) को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके तहत 16 जनवरी को राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में दिनभर चुनाव से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुसार संपन्न कराने की जानकारी दी जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को 50-50 चुनाव चिन्ह जारी कर दिए हैं और निर्देश दिया है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के पूरा होने के बाद इस महीने के अंत तक नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि राज्य में 48 नगर निकायों के चुनाव के लिए वार्ड पार्षद और मेयर/अध्यक्ष पदों का आरक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है। ऐसे में प्रशिक्षण के बाद आयोग द्वारा उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर चुनाव की घोषणा की प्रक्रिया पूरी किए जाने की उम्मीद है।
मेयर पद के लिए बैलेट पेपर पिंक रंग का होगा
इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर पर्याप्त संख्या में बैलेट बॉक्स उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि बैलेट बॉक्स की रंगाई और मरम्मत का कार्य जिला स्तर पर पहले ही पूरा कर लिया गया है। सचिव ने स्पष्ट किया कि मेयर पद के लिए बैलेट पेपर पिंक रंग का होगा, जबकि वार्ड पार्षद के लिए सफेद रंग का बैलेट पेपर इस्तेमाल किया जाएगा। एक ही बैलेट बॉक्स में दोनों पदों के लिए मतदान कराए जाने के निर्णय से मतगणना में समय अधिक लगने की संभावना जताई जा रही है। मतगणना के दौरान सभी बैलेट बॉक्स से निकले बैलेट पेपर को पहले पद के अनुसार अलग-अलग किया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर होने से छंटाई में सुविधा होगी, फिर भी स्वाभाविक रूप से काउंटिंग में देरी हो सकती है, जिससे चुनाव परिणाम आने में समय लग सकता है।





