सूअर की किडनी ने 271 दिन बचाया डायलिसिस से, फिर मिली इंसानी किडनी; मेडिकल साइंस की इस कामयाबी का क्या मतलब?

किडनी फेलियर से जूझ रहे मरीजों के लिए डायलिसिस जिंदगी का हिस्सा बन जाती है। ऐसे में अमेरिका के एक मरीज की मेडिकल यात्रा ने भविष्य के इलाज की नई उम्मीद जगाई है। टिम एंड्रयूज नाम के मरीज के शरीर में जेनेटिकली एडिट की गई सूअर की किडनी ने 271 दिनों तक काम किया और इस दौरान उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बाद उन्हें इंसानी डोनर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। वैज्ञानिकों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सूअर की किडनी ने इंसानी अंग मिलने तक एक तरह के ‘ब्रिज’ का काम किया।
टिम एंड्रयूज को क्यों लगाई गई सूअर की किडनी?
टिम एंड्रयूज को एंड-स्टेज किडनी डिजीज थी। ऐसी स्थिति में किडनी की कार्यक्षमता बेहद कम हो जाती है और मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
लेकिन इंसानी किडनी की उपलब्धता सीमित है। एंड्रयूज के मामले में भी जल्द मानव डोनर मिलना आसान नहीं था। इसी वजह से डॉक्टरों ने xenotransplantation यानी जानवर के अंग को इंसान में ट्रांसप्लांट करने की तकनीक का इस्तेमाल किया।
सूअर की किडनी सामान्य नहीं थी
मरीज को सामान्य सूअर की किडनी नहीं लगाई गई थी। इसे जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए इस तरह बदला गया था कि इंसानी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उसे आसानी से रिजेक्ट न करे।
इस किडनी में 69 जेनेटिक एडिट किए गए थे। इनका उद्देश्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और रक्त संबंधी समस्याओं को कम करना तथा संभावित संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित करना था।
271 दिनों तक डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी
जनवरी 2025 में ट्रांसप्लांट के बाद सूअर की किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। एंड्रयूज करीब 271 दिन तक बिना डायलिसिस रहे।
Mass General Brigham के शोधकर्ताओं के अनुसार, जीवित इंसान में सूअर की किडनी के साथ यह अब तक का सबसे लंबा दर्ज dialysis-free survival है।
यानी करीब नौ महीने तक प्रयोगात्मक अंग ने मरीज के शरीर में वह काम किया, जो आमतौर पर उसकी अपनी किडनी नहीं कर पा रही थी।
फिर सूअर की किडनी क्यों निकाली गई?
करीब नौ महीने बाद किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगी। मरीज को संक्रमण होने के बाद उसकी इम्यूनोसप्रेशन दवाओं में कमी की गई थी। इसके बाद सूअर की किडनी में सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं से जुड़ी चोट और सूजन बढ़ी और आखिरकार अंग ने काम करना बंद कर दिया।
अक्टूबर 2025 में डॉक्टरों ने सूअर की किडनी निकाल दी। इसके बाद एंड्रयूज को कुछ समय के लिए फिर डायलिसिस पर लौटना पड़ा।
इसके बाद मिली इंसानी किडनी
इस पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा इसके बाद सामने आया। जनवरी 2026 में एंड्रयूज को एक मृत मानव डोनर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई।
नई किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पहला ऐसा मामला है जिसमें किसी मरीज ने पहले जेनेटिकली एडिटेड सूअर की किडनी प्राप्त की और बाद में उसी मेडिकल यात्रा में मानव डोनर की किडनी भी सफलतापूर्वक प्राप्त की।
इसे मेडिकल साइंस में बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है?
किडनी ट्रांसप्लांट के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डोनर अंगों की कमी है। हजारों मरीज लंबे समय तक किडनी का इंतजार करते हैं और इस दौरान डायलिसिस पर निर्भर रहते हैं।
एंड्रयूज का मामला यह संभावना दिखाता है कि भविष्य में जेनेटिकली एडिटेड सूअर की किडनी का इस्तेमाल मानव किडनी मिलने तक अस्थायी समाधान के रूप में किया जा सकता है।
यानी मरीज महीनों तक डायलिसिस पर रहने के बजाय किसी जेनेटिकली एडिटेड पशु अंग की मदद से मानव डोनर मिलने तक इंतजार कर सकता है।
अभी इलाज का सामान्य विकल्प नहीं बनी है यह तकनीक
हालांकि इसे लेकर उत्साह काफी है, लेकिन इसे अभी आम मरीजों के लिए उपलब्ध इलाज नहीं माना जा सकता। यह तकनीक अभी प्रयोगात्मक चरण में है और वैज्ञानिकों को लंबे समय तक अंग के काम करने, इम्यून रिजेक्शन, संक्रमण और दूसरी जटिलताओं पर और शोध करना होगा।
फिर भी 271 दिनों का यह अनुभव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहली बार यह मजबूत संकेत मिला है कि जानवर से इंसान में किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ कुछ दिनों या हफ्तों का प्रयोग नहीं, बल्कि मानव अंग मिलने तक एक संभावित मेडिकल ब्रिज भी बन सकता है।
इस केस की 6 बड़ी बातें
- टिम एंड्रयूज को जेनेटिकली एडिटेड सूअर की किडनी लगाई गई थी।
- किडनी ने 271 दिन तक काम किया।
- इस दौरान मरीज को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी।
- बाद में सूअर की किडनी को निकालना पड़ा।
- जनवरी 2026 में उन्हें मानव डोनर की किडनी मिली।
- यह मामला भविष्य में किडनी की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद पैदा कर रहा है।
डायलिसिस से आगे की उम्मीद
टिम एंड्रयूज की कहानी फिलहाल किसी इलाज के आम विकल्प की घोषणा नहीं है, लेकिन यह मेडिकल साइंस के उस रास्ते की झलक जरूर देती है जिस पर वैज्ञानिक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
अगर आने वाले वर्षों में जेनेटिकली एडिटेड पशु अंगों को सुरक्षित और लंबे समय तक इंसानी शरीर में काम कराने में सफलता मिलती है, तो डोनर किडनी की कमी और लंबे समय तक डायलिसिस की समस्या को काफी हद तक कम करने की संभावना बन सकती है।
👉 यह भी पढ़ें:





