ईरान के चीफ जस्टिस भारत दौरे पर, दिल्ली में खास सम्मेलन; मौलाना यासूब अब्बास ने बताया भारत-ईरान रिश्तों का महत्व

ईरान के चीफ जस्टिस आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई भारत दौरे पर हैं। उनके स्वागत में नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास में एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास भी शामिल हुए और उन्होंने भारत-ईरान के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
ईरानी चीफ जस्टिस के स्वागत में खास कार्यक्रम
ईरान के चीफ जस्टिस की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में आयोजित इस सम्मेलन में दोनों देशों के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौलाना यासूब अब्बास ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
अब्बास ने अपने संबोधन में ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई को भी याद किया और न्याय तथा वंचितों के समर्थन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
भारत-ईरान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि भारत और ईरान के बीच रिश्ते केवल राजनीतिक या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क के संबंध रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान इन संबंधों को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
कौन-कौन रहा मौजूद?
कार्यक्रम में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही, भारत में ईरान के राजदूत डॉ. फतहली सहित कई धार्मिक विद्वान, मौलाना और समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र दिल्ली के साथ-साथ लखनऊ भी रहा है। लखनऊ की शिया और फारसी सांस्कृतिक परंपराओं के कारण दोनों देशों के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक संवाद का विशेष महत्व माना जाता है।
ऐसे समय में हुई मुलाकात जब पश्चिम एशिया पर दुनिया की नजर
ईरान के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी खास नजर से देखा जा रहा है।
हालांकि, इस सम्मेलन को लेकर सामने आई जानकारी मुख्य रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक सहयोग पर केंद्रित है। इससे किसी अलग राजनीतिक समझौते या फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भारत-ईरान संबंधों में सांस्कृतिक कड़ी अहम
भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत और सांस्कृतिक संपर्क रहे हैं। भाषा, साहित्य, धर्म, कला और व्यापार ने दोनों देशों के बीच रिश्तों को अलग पहचान दी है। ऐसे कार्यक्रम इन पारंपरिक संबंधों को आधुनिक दौर में आगे बढ़ाने का मंच बनते हैं।
ईरानी चीफ जस्टिस की भारत यात्रा के दौरान हुआ यह सम्मेलन भी इसी व्यापक सांस्कृतिक और धार्मिक संवाद की कड़ी के रूप में सामने आया है।
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