स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में थाने पहुंचा हिंदू रक्षा दल, FIR पर उठाए सवाल; PM मोदी के शपथ ग्रहण का न्योता भी चर्चा में

जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता से कथित मारपीट के मामले में आरोपी बताए जा रहे स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ दिल्ली पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लेकर मामले में कार्रवाई तेज की है, तो दूसरी तरफ उनके समर्थन में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंच गए। संगठन ने पुलिस की ओर से दर्ज FIR को गलत बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
FIR में POCSO और SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ीं
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर हुई घटना के बाद पहले स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बाद में छात्रा की ओर से सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने की शिकायत के आधार पर POCSO एक्ट के तहत अलग FIR दर्ज की गई। पुलिस ने पहले दर्ज मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।
हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वतंत्र के खिलाफ गंभीर धाराएं गलत तरीके से लगाई गई हैं। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। अब इस पूरे मामले में पुलिस जांच यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
आखिर जंतर-मंतर पर हुआ क्या था?
मामला 23 जून की शाम जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था और मोबाइल से वीडियो बना रहा था। इसी दौरान कुछ युवकों के साथ उसकी कहासुनी हुई और आरोप है कि उसे घेरकर मारपीट की गई।
पीड़ित के सिर पर चोटें आईं और उसे इलाज के लिए RML अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल जांच में सिर पर दो कटे हुए घाव मिलने की बात सामने आई है।
मामला तब और गरमा गया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक कथित पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित तौर पर छात्रा के पिता पर हमला करने और उन्हें गंभीर चोट पहुंचने की बात कहते सुनाई दिए। इसके बाद CJP की ओर से उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई।
बुलंदशहर से हिरासत में लिए गए स्वतंत्र
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब CJP समर्थकों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिया था।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कथित वायरल वीडियो और आरोपी की गतिविधियों को भी जांच के दायरे में लिया है।
नेताओं के साथ तस्वीरों ने भी बढ़ाई चर्चा
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां भी चर्चा में आ गई हैं। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर कई राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाई देती हैं। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ तस्वीरें शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारद्वाज ने 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए मिले निमंत्रण पत्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। इसके अलावा उन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी निमंत्रण का भी दावा करते हुए तस्वीर पोस्ट की थी। हालांकि, इन तस्वीरों या निमंत्रणों से किसी राजनीतिक नेता की उनके मामले में भूमिका साबित नहीं होती।
चिराग पासवान ने किया दूरी बनाने का दावा
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भारद्वाज द्वारा नेताओं के नाम का इस्तेमाल किए जाने से दूरी बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, भारद्वाज के वायरल वीडियो में जिन राजनीतिक नेताओं के नाम लिए गए, उनके कथित हस्तक्षेप का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को फिलहाल केवल आरोपी के कथन के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अब जांच पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ चुके हैं। पीड़ित पक्ष गंभीर कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है, जबकि हिंदू रक्षा दल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामलों को गलत बता रहा है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच आगे बढ़ा दी है।
अब जांच में वायरल वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, मौके के वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह तय होना है कि जंतर-मंतर पर वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों की कानूनी स्थिति क्या बनती है। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले जांच और अदालत की प्रक्रिया का इंतजार करना जरूरी है।
👉 यह भी पढ़ें:





