तिरुवल्लुर अमोनिया गैस लीक हादसा: मौतों का आंकड़ा 16 पहुंचा, झारखंड समेत कई राज्यों के प्रवासी मजदूर बने शिकार

चेन्नई: तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में स्थित St. Peter & Paul Sea Food Export Private Limited फैक्ट्री में हुए अमोनिया गैस रिसाव हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। मृतकों में अधिकांश ओडिशा, असम और झारखंड के प्रवासी मजदूर हैं। कई अन्य कर्मचारी अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है।
यह हादसा हाल के वर्षों में तमिलनाडु के सबसे गंभीर औद्योगिक हादसों में से एक माना जा रहा है।

कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, 21 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे फैक्ट्री की रेफ्रिजरेशन यूनिट से जुड़ी अमोनिया पाइपलाइन में अचानक रिसाव हो गया। उस समय ग्राउंड फ्लोर पर पुरुष कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि पहली मंजिल पर नाइट शिफ्ट के बाद कई महिला कर्मचारी आराम कर रही थीं।
कुछ ही सेकंड में जहरीली अमोनिया गैस पूरे परिसर में फैल गई। गैस के कारण कर्मचारियों को आंखों में तेज जलन, सांस लेने में तकलीफ और दम घुटने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
पुरुष कर्मचारियों ने बचाई कई जिंदगियां
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई पुरुष कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर बार-बार गैस से भरे कमरों में गए और बेहोश महिलाओं को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। हालांकि गैस का असर इतना अधिक था कि कोई भी कर्मचारी कुछ सेकंड से ज्यादा अंदर नहीं रह सका।
बचाव कार्य में देरी के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड और आपदा राहत टीम मौके पर देर से पहुंची। शुरुआती रेस्क्यू का अधिकांश काम फैक्ट्री के कर्मचारियों ने ही किया। यदि राहत दल समय पर पहुंचता तो कई और लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पतालों में जारी इलाज
हादसे में घायल कई कर्मचारियों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अमोनिया गैस के संपर्क में आने से मरीजों में फेफड़ों को नुकसान, आंखों और गले में गंभीर जलन तथा सांस संबंधी जटिलताएं देखी गई हैं। कुछ मरीजों को वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा।
मृतकों में झारखंड की महिला भी शामिल
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार हादसे में 13 लोगों की मौत ओडिशा, 2 की असम और 1 की झारखंड से होने की पुष्टि हुई है। अधिकांश पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर प्रवासी मजदूर थे, जो रोजगार की तलाश में तमिलनाडु पहुंचे थे।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक, मैनेजर और अन्य जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि रेफ्रिजरेशन सिस्टम में अत्यधिक दबाव बनने के कारण अमोनिया पाइपलाइन फट गई। बताया जा रहा है कि पहले भी फैक्ट्री में छोटे स्तर पर गैस रिसाव की घटनाएं हो चुकी थीं।
तमिलनाडु सरकार की विशेषज्ञ समिति ने फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करने की सिफारिश की है। साथ ही राज्य की सभी खतरनाक रसायन इकाइयों की सुरक्षा जांच के आदेश दिए गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों, आपातकालीन तैयारियों और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाता तो इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी।
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