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Saturday, November 7, 2026
2 साल तक सिर्फ 12वां खिलाड़ी!
पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे ने बताया कि टेस्ट डेब्यू से पहले उन्हें दो साल और 20 मैचों तक 12वें खिलाड़ी के रूप में इंतजार करना पड़ा।
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दो साल तक सिर्फ पानी पिलाता रहा…’ अजिंक्य रहाणे ने सुनाया करियर का सबसे मुश्किल दौर

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब टीम में चयन होने के बावजूद उन्हें लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ता था। रहाणे ने बताया कि टेस्ट डेब्यू से पहले उन्होंने करीब दो साल तक 20 टेस्ट मैचों में 12वें खिलाड़ी की भूमिका निभाई। उनका कहना है कि यही कठिन समय आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

’20 मैच इंतजार किया, दो साल तक रहा 12वां खिलाड़ी’

रहाणे ने अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान बताया कि 2011 में टीम इंडिया के साथ जुड़ने के बाद उन्हें तुरंत टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला।

उन्होंने कहा,

“मुझे टेस्ट डेब्यू के लिए 20 मैचों तक इंतजार करना पड़ा। लगभग दो साल तक मैं सिर्फ 12वां खिलाड़ी रहा।”

रहाणे के मुताबिक यह उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को बेहतर बनाने का फैसला किया।

‘पानी पिलाने में कोई बुराई नहीं’

रहाणे ने कहा कि उस समय उनके सामने दो रास्ते थे—या तो अपनी स्थिति पर अफसोस करें या उस समय का इस्तेमाल सीखने में करें।

उन्होंने कहा,

“12वां खिलाड़ी होने, पानी पिलाने या अपने साथियों की मदद करने में कोई बुराई नहीं है। मैंने इसे हमेशा सकारात्मक तरीके से लिया।”

उनका मानना है कि इसी सोच ने उन्हें लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाया।

सीनियर खिलाड़ियों से बहुत कुछ सीखा

रहाणे ने बताया कि जब उन्हें खेलने का मौका नहीं मिलता था, तब वह ड्रेसिंग रूम में बैठकर सीनियर खिलाड़ियों को करीब से देखते और उनसे सीखते थे।

उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ मैदान पर खेलना ही नहीं, बल्कि टीम के माहौल, तैयारी और मानसिकता को समझना भी एक खिलाड़ी को बेहतर बनाता है। यही अनुभव बाद में उनके प्रदर्शन में नजर आया।

2013 में मिला टेस्ट डेब्यू, फिर बने टीम इंडिया की दीवार

अजिंक्य रहाणे ने 2011 में वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन टेस्ट कैप उन्हें मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली।

इसके बाद उन्होंने विदेशों में कई यादगार पारियां खेलीं और भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में अपनी पहचान बनाई। बाद में वह टेस्ट टीम के उपकप्तान और कप्तान भी बने तथा ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई।

युवा खिलाड़ियों को दिया बड़ा संदेश

रहाणे का कहना है कि हर खिलाड़ी के करियर में ऐसा समय आता है, जब मौके कम मिलते हैं।

उनके अनुसार ऐसे समय में शिकायत करने के बजाय धैर्य रखना, मेहनत जारी रखना और सीखते रहना ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। यही सोच उन्हें भारतीय क्रिकेट में लंबा और सफल करियर बनाने में मददगार साबित हुई।

मुख्य बातें

  • अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट डेब्यू से पहले के संघर्ष को याद किया।
  • दो साल तक 12वें खिलाड़ी के रूप में टीम के साथ रहे।
  • टेस्ट डेब्यू के लिए 20 मैचों का इंतजार करना पड़ा।
  • रहाणे बोले—”पानी पिलाने में कोई बुराई नहीं, मैंने इसे सीखने का मौका माना।”
  • धैर्य और सकारात्मक सोच ने उन्हें सफल टेस्ट क्रिकेटर बनाया।

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