About me

News Box Bharat
Welcome to News Box Bharat, your one-stop destination for comprehensive news coverage and insightful analysis. With a commitment to delivering reliable information and promoting responsible journalism, we strive to keep you informed about the latest happenings from across the nation and the world. In this rapidly evolving era, staying updated and making sense of the news is crucial, and we are here to simplify the process for you.

Recent Posts

+91 6205-216-893 info@newsboxbharat.com
Wednesday, August 12, 2026
Latest Hindi NewsNews

कावेरी जल विवाद: कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश

Cauvery River amid Karnataka Tamil Nadu water dispute
कावेरी जल विवाद फिर गरमा गया है। CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश का समर्थन किया है।
Share the post

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसमें कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

यह पानी 15 दिनों तक, यानी 12 अगस्त से छोड़ा जाना है। CWMA के निर्देश के अनुसार कर्नाटक को अपने जलाशयों से पानी का प्रवाह इस तरह नियंत्रित करना होगा कि तमिलनाडु की सीमा पर स्थित बिलिगुंडुलु माप बिंदु पर निर्धारित मात्रा में पानी पहुंच सके।

क्यों लिया गया यह फैसला?

कावेरी जल विनियमन समिति ने इससे पहले 28 जुलाई को कर्नाटक को 15 दिनों के लिए रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा था। इस निर्देश को बाद में CWMA ने भी बरकरार रखा था।

तमिलनाडु ने आरोप लगाया कि इस अवधि में कर्नाटक से निर्धारित मात्रा में पानी नहीं पहुंचा। तमिलनाडु के अनुसार, 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडुलु में वास्तविक प्रवाह करीब 158 से 550 क्यूसेक के बीच ही रहा, जो तय मात्रा से काफी कम था। इसके बाद पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाने का मुद्दा फिर CWRC के सामने आया।

कर्नाटक के सामने पानी की कमी की चुनौती

कर्नाटक की ओर से जलाशयों में पानी के स्तर और आवक को लेकर चिंता जताई गई है। राज्य में कम बारिश और घटते जल भंडार के बीच तमिलनाडु के लिए इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने का फैसला राजनीतिक और किसान संगठनों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

मांड्या समेत कर्नाटक के कुछ इलाकों में किसानों ने CWRC के फैसले का विरोध भी किया है। किसानों का कहना है कि राज्य में पहले से पानी की कमी है और ऐसे समय में पानी बाहर छोड़ना कृषि जरूरतों पर असर डाल सकता है।

कर्नाटक सरकार की आगे की रणनीति पर नजर

CWMA के नए निर्देश के बाद कर्नाटक सरकार के सामने अब अगला कदम तय करने की चुनौती है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस मुद्दे पर मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कांग्रेस नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठक बुलाने की तैयारी की है। बैठक में CWMA के निर्देश पर राज्य की रणनीति और आगे की कानूनी संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।

कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। बारिश और जलाशयों में पानी की उपलब्धता के आधार पर हर साल पानी छोड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता रहा है। इस बार 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के नए निर्देश से विवाद के फिर तेज होने की संभावना है।

👉 यह भी पढ़ें:

Leave a Response