Gold Price Today: चौथे सप्ताह भी सोना फिसला, मजबूत डॉलर और फेड की सख्ती से कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली, 26 जून 2026: वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को मामूली बढ़त के बावजूद गोल्ड लगातार चौथे सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सोने की कीमत में मामूली सुधार, लेकिन साप्ताहिक गिरावट जारी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.3% बढ़कर 4,036.88 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.1% की बढ़त के साथ 4,051.30 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे।
हालांकि, पूरे सप्ताह की बात करें तो सोने की कीमत में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं जून महीने में अब तक गोल्ड करीब 11% से अधिक टूट चुका है।
क्यों गिर रही हैं सोने की कीमतें?
1. मजबूत अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी डॉलर 13 महीने के उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग कमजोर पड़ती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
2. फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना
अमेरिका के ताजा PCE मुद्रास्फीति (Inflation) आंकड़ों के अनुसार मई में महंगाई दर 4.1% रही, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, CME FedWatch Tool सितंबर तक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की लगभग 63% संभावना दिखा रहा है। ऊंची ब्याज दरों का असर सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट पर नकारात्मक माना जाता है।
मध्य पूर्व तनाव का सीमित असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक कार्गो जहाज पर हमले की खबर के बाद कुछ समय के लिए सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की मांग बढ़ी थी। हालांकि डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की चिंता के सामने यह असर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया।
अन्य कीमती धातुओं का हाल
- चांदी (Silver): 0.1% बढ़कर 57.96 डॉलर प्रति औंस, लेकिन सप्ताह में करीब 12% की गिरावट।
- प्लैटिनम (Platinum): 1% बढ़कर 1,618.23 डॉलर प्रति औंस, हालांकि लगातार सातवें सप्ताह गिरावट की ओर।
- कॉपर (Copper): LME पर 0.4% गिरकर 13,249.33 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहेगा और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने में फिर से खरीदारी देखने को मिल सकती है.
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