भारत-रूस की दोस्ती में फिर बड़ा अध्याय, पुतिन की यात्रा से पहले सुखोई अपग्रेड और नई डिफेंस डील पर नजर

भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक और रक्षा साझेदारी एक बार फिर चर्चा में है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और दिल्ली में होने वाली BRICS गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावनाएं सामने आ रही हैं। खास नजर भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेड और रूस के साथ नई तकनीकी साझेदारी पर है।
सुखोई-30MKI के अपग्रेड पर बड़ा फोकस
भारत और रूस के रक्षा सहयोग में Su-30MKI सबसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म में से एक है। भारत पहले से ही इन विमानों के अपग्रेड और स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है।
सरकार के अनुसार भारत-रूस रक्षा साझेदारी में Su-30MKI के अपग्रेड को समर्थन मिला है और दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग तथा तकनीक साझा करने के अवसरों पर लगातार काम कर रहे हैं।
Su-57 को लेकर भी रूस का बड़ा ऑफर
रूस भारत को अपनी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Su-57 की पेशकश कर चुका है। इसमें संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावना भी शामिल है। रूस की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपनी वायुसेना के लिए आधुनिक फाइटर जेट क्षमता बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है।
हाल की रिपोर्टों में रूस की ओर से भारत को तत्काल Su-57 विमान उपलब्ध कराने के प्रस्ताव की भी चर्चा है। हालांकि किसी भी संभावित सौदे को अंतिम समझौता मानना अभी जल्दबाजी होगी।
भारत-रूस रक्षा संबंध सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं
भारत और रूस का रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है। अब यह संबंध केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और भारत में रक्षा प्रणालियों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।
Su-30MKI, T-90 टैंक और BrahMos मिसाइल इस साझेदारी के प्रमुख उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारत-रूस रक्षा संबंधों को खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन की साझेदारी बताया है।
ब्रिक्स के बीच रणनीतिक संदेश भी अहम
BRICS के मंच पर भारत और रूस के बीच बातचीत केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहती। दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
जून 2026 में भारत और रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने BRICS ढांचे के तहत सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति पर चर्चा की थी।
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत के लिए रूस के साथ रक्षा सहयोग का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे मौजूदा हथियार प्रणालियों के रखरखाव, आधुनिकीकरण और स्वदेशी उत्पादन को गति मिल सकती है। साथ ही Su-30MKI जैसे विमानों के अपग्रेड से भारतीय वायुसेना की मौजूदा क्षमता को लंबे समय तक मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।
भारत अब रक्षा क्षेत्र में Make in India और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दे रहा है। इसलिए भविष्य की साझेदारी में केवल तैयार हथियार खरीदने के बजाय तकनीक, उत्पादन और MRO क्षमता को ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद है।
पुतिन की भारत यात्रा और BRICS से जुड़े घटनाक्रमों के बीच भारत-रूस रक्षा साझेदारी एक बार फिर सुर्खियों में है। Su-30MKI अपग्रेड से लेकर Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और संयुक्त रक्षा उत्पादन तक कई मुद्दे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।





