राघव चड्ढा का पहला बड़ा राज्यसभा भाषण: “रिस्क मेरा, रील तुम्हारी…” वाली लाइन क्यों हुई वायरल?

राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद राघव चड्ढा का पहला बड़ा भाषण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों के आंदोलन, पेपर लीक और राजनीति की भूमिका पर बात करते हुए कई तीखे बयान दिए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा एक पंक्ति की हो रही है— “रिस्क मेरा, रील तुम्हारी… ये कैसी पार्टनरशिप?”
अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद यह राज्यसभा में उनका पहला प्रमुख भाषण था। उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा प्रणाली की समस्या नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा संगठित अपराध है।
“छात्रों का आंदोलन, राजनीति का मंच नहीं”
राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने, प्रदर्शन करने, अदालत जाने और शांतिपूर्ण मार्च निकालने का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि छात्र आंदोलन को राजनीतिक दलों की रैली में नहीं बदलना चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने वह टिप्पणी की, जो अब सोशल मीडिया पर सबसे अधिक साझा की जा रही है।
“जब राजनीतिक दलों के नेता आंदोलन के समय स्टूडेंट्स को बैरिकेड्स के आगे भेजकर खुद कैमरे के सेफ साइड पर रहें, तो उनसे पूछिए— रिस्क मेरा और रील तुम्हारी… ये कैसी पार्टनरशिप?”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों की समस्याओं से ज्यादा अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी बढ़ाने में रुचि रखते हैं।
“यह लड़ाई मेरिट बनाम माफिया की है”
अपने भाषण में चड्ढा ने कहा कि छात्रों को न्याय और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली चाहिए, जबकि कुछ दल केवल राजनीतिक लाभ और वायरल वीडियो की तलाश में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह बहस किसी पार्टी विशेष की नहीं, बल्कि “मेरिट बनाम माफिया और मेहनत बनाम सेटिंग” की है।
पेपर लीक को बताया “कैंसर”
राघव चड्ढा ने पेपर लीक को “क्रॉनिक डिजीज” और “पैन-इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम” बताया।
उन्होंने कहा,
“कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं हो सकता। उसी तरह पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल मीडिया साउंड-बाइट से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था से होगा।”
उनके अनुसार, सरकार का यह विधेयक देश में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करता है।
“पहले सवाल पूछता था, अब समाधान देना जिम्मेदारी”
अपने राजनीतिक बदलाव का जिक्र करते हुए चड्ढा ने कहा,
“जब मैं विपक्ष में बैठता था, सवाल मेरा हथियार था। आज ट्रेजरी बेंच पर हूं, तो समाधान मेरी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका केवल आलोचना सुनने की नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाने की भी होती है।
राज्यसभा से भी पास हुआ विधेयक
लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून बन जाएगा।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
- प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
- संगठित पेपर लीक गिरोहों पर 7 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।
- जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
- फास्ट-ट्रैक अदालतों में तीन महीने के भीतर सुनवाई।
- परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर भारी आर्थिक दंड और आठ वर्ष तक डिबारमेंट का प्रावधान।
विपक्ष ने किया वॉकआउट
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। वहीं, राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों का गुस्सा उचित है और परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उनका यह भाषण अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किया जा रहा है, खासकर “रिस्क मेरा, रील तुम्हारी” वाली टिप्पणी को लेकर।
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