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Saturday, October 31, 2026
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को दर्शाता सांकेतिक चित्र।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति संविधान और नए कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
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भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है? जानिए पूरी प्रक्रिया

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मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner-CEC) का पद भारत के लोकतंत्र की सबसे अहम संवैधानिक जिम्मेदारियों में से एक माना जाता है। लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास होती है। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है, यह सवाल हाल के दिनों में फिर चर्चा में है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि भारत में CEC की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया क्या है और इसमें समय के साथ क्या बदलाव हुए हैं।

चुनाव आयोग क्या है?

भारत का चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत किया गया है। इसका काम देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है।

चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्त (EC) होते हैं। तीनों को समान अधिकार प्राप्त होते हैं और आयोग के फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।

पहले नियुक्ति कैसे होती थी?

कई दशकों तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते थे। व्यवहार में राष्ट्रपति यह नियुक्ति केंद्र सरकार की सलाह पर करते थे।

हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए कोई अलग कानून नहीं था। इसी वजह से लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग की जा रही थी जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संस्थागत हो।

2023 में क्या बदला?

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल मामले में फैसला सुनाया कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर होगी।

इस समिति में शामिल थे—

  • प्रधानमंत्री
  • लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)

अदालत ने कहा था कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहेगी।

नया कानून क्या कहता है?

दिसंबर 2023 में संसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम पारित किया।

इस कानून के तहत चयन समिति में बदलाव किया गया। अब समिति में शामिल हैं—

  • प्रधानमंत्री
  • लोकसभा में विपक्ष के नेता
  • प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री

यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) अब इस समिति का हिस्सा नहीं हैं।

विवाद क्यों हो रहा है?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था में चयन समिति में सरकार के दो सदस्य और विपक्ष का एक सदस्य होता है। उनका तर्क है कि इससे सरकार का प्रभाव बढ़ सकता है और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठ सकते हैं।

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि संसद को कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार है और प्रधानमंत्री सहित निर्वाचित सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत भरोसा किया जाना चाहिए।

नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?

मौजूदा कानून के तहत प्रक्रिया इस प्रकार है—

  • संबंधित पद खाली होने पर चयन प्रक्रिया शुरू होती है।
  • उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जाता है।
  • चयन समिति अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है।
  • राष्ट्रपति औपचारिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करते हैं।

अब मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों है?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में नए कानून को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चयन समिति से CJI को हटाना चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर केंद्र सरकार इस कानून को संवैधानिक और वैध बता रही है। अब अदालत तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई बड़ी संविधान पीठ करेगी या नहीं। इस फैसले पर भविष्य की नियुक्ति व्यवस्था की दिशा भी काफी हद तक निर्भर करेगी।

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