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Tuesday, July 21, 2026
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एक क्लिक में दिखेगा झारखंड का पूरा जंगल! हेमंत सोरेन ने दिए बड़े निर्देश

झारखंड मंत्रालय में वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक करते मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, वन क्षेत्रों के डिजिटल रिकॉर्ड और पौधारोपण अभियान को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते हुए।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने वन विभाग की समीक्षा बैठक में झारखंड के सभी वन क्षेत्रों का एक महीने के भीतर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए।
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रांची। झारखंड ख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने राज्य के सभी वन क्षेत्रों का एक माह के भीतर तकनीकी एवं डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे एक क्लिक पर पूरे राज्य के वन क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति, सीमाएं और संरचना की जानकारी उपलब्ध हो सके।

वन क्षेत्रों की होगी डिजिटल मैपिंग

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को वन क्षेत्रों की डिजिटल मैप लेयरिंग तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद वन क्षेत्रों में कई बदलाव हुए हैं। कहीं जंगलों का विस्तार हुआ है तो कहीं इको-टूरिज्म परियोजनाएं विकसित हुई हैं। वहीं खनन, वन कटाई और वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं में भी परिवर्तन आया है। ऐसे में अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना समय की जरूरत है।

बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाए और सूखे एवं अनुपयोगी पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई की योजना बनाई जाए, ताकि अधिक से अधिक नए पौधे लगाए जा सकें। उन्होंने हेलीकॉप्टर से बीज गिराकर वन विस्तार की संभावनाओं पर भी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

हाथी प्रभावित परिवारों को जल्द मिले मुआवजा

बैठक में मुख्यमंत्री ने जंगली हाथियों के हमलों में मृत लोगों के आश्रितों, फसल नुकसान और क्षतिग्रस्त मकानों के मुआवजे का भुगतान तेजी से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को राहत देने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।

इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। वन विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर समन्वित योजना तैयार करें, ताकि राज्य में पर्यटन को नई गति मिल सके और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें।

स्थानीय जरूरतों के अनुसार होंगे पौधे

हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। ऐसे पौधे लगाए जाएं जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करें। उन्होंने बड़े पैमाने पर महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर, अर्जुन, कटहल, आंवला और चिरौंजी जैसे उपयोगी एवं स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इनसे वन उपज बढ़ेगी, ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी और तसर व लाख उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं” योजना का प्रचार होगा

मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में भी पौधरोपण बढ़ाने पर जोर दिया और अधिकारियों को “पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ” योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत एक पेड़ लगाने पर पांच यूनिट मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए।

वन पट्टा मामलों का जल्द होगा निपटारा

बैठक में मुख्यमंत्री ने लंबित वन पट्टा मामलों के शीघ्र निष्पादन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभुकों को बिना अनावश्यक देरी के वन पट्टा उपलब्ध कराया जाए और विभाग की सभी योजनाओं का पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

काजू और बांस की खेती पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बड़े भूभागों की पहचान कर काजू और बांस (बैम्बू) की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बांस आधारित उद्योगों व हस्तशिल्प को भी नई पहचान मिलेगी।

सभी जिलों के डीएफओ से की सीधी बात

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों (DFO) से ऑनलाइन संवाद किया। उन्होंने दुमका, जामताड़ा और कोडरमा के अधिकारियों से वन पट्टा वितरण, पौधरोपण, इको-टूरिज्म और अन्य योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

प्रदूषण नियंत्रण पर भी सख्ती

बैठक में प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) और जनविश्वास ऐप के प्रभावी संचालन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके घने जंगल, प्राकृतिक संपदा, वन्यजीव और जैव विविधता हैं। इनका संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने अधिकारियों से वन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, ग्रामीण आजीविका और सतत विकास को साथ लेकर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।

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