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Monday, October 19, 2026
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची पर तकनीकी सत्र
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन पैनल चर्चा समेत छह तकनीकी सत्रों में मतदाता पंजीकरण पर मंथन

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रांची में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। सम्मेलन में पैनल डिस्कशन के साथ छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश-विदेश की चुनावी व्यवस्थाओं, निर्वाचन समावेशन, मतदाता जागरूकता, सोशल मीडिया, महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं से जुड़ी चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

“Voter Registration and Voter Register” पर पैनल चर्चा

उद्घाटन सत्र के बाद “Voter Registration and Voter Register” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम ने की, जबकि प्रो. संदीप शास्त्री सह-अध्यक्ष रहे।

चर्चा के दौरान मतदाता जागरूकता, निर्वाचन समावेशन, मतदान को आसान बनाने, EPIC और मतदाता सूची में एकरूपता, महिलाओं की निर्वाचन भागीदारी तथा आंतरिक प्रवासन जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने सार्वजनिक जवाबदेही के साथ-साथ विभिन्न देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर भी चर्चा की।

छह तकनीकी सत्रों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा

लोकतंत्र को मजबूत करने पर तकनीकी सत्र

पहला तकनीकी सत्र “Voter Registration and Voter Register—Strengthening Democracy” विषय पर हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रो. सुधीर कुमार सिंह और सह-अध्यक्षता डॉ. प्रतिमा सारंगी ने की।

इस सत्र में नागरिकता, मतदाता पंजीकरण, राजनीतिक दलों की भूमिका और लोकतंत्र को मजबूत करने से जुड़े शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।

दुनिया के अलग-अलग देशों के अनुभवों पर चर्चा

दूसरे तकनीकी सत्र का विषय “Voter Registration: Cross Country Experience Across Globe” रहा। इसकी अध्यक्षता डॉ. महेश देबता और सह-अध्यक्षता डॉ. बी.बी. बिस्वास ने की।

इस दौरान एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और उनके अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया।

मतदाता पंजीकरण के सैद्धांतिक पहलुओं पर मंथन

तीसरे तकनीकी सत्र में “Voter Registration: Theoretical Paradigm” विषय पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता चैतन्य प्रसाद और सह-अध्यक्षता प्रो. दिवांशु श्रीवास्तव ने की।

सत्र में निर्वाचन समावेशन, लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन के सैद्धांतिक पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर चर्चा

चौथे तकनीकी सत्र का विषय “Voter Registration and Voter Register—Social Media and Imperative of Awareness” था। इसकी अध्यक्षता शिव प्रसाद शर्मा और सह-अध्यक्षता प्रो. संजय कुमार ने की।

इस सत्र में सोशल मीडिया के जरिए मतदाता जागरूकता, बहुभाषी निर्वाचन साक्षरता और मतदाता पंजीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित उपयोग पर शोध प्रस्तुत किए गए।

ऑनलाइन पंजीकरण और आधुनिक तकनीक पर जोर

पांचवें तकनीकी सत्र में भी “Voter Registration: Cross Country Experience Across Globe” विषय पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे और सह-अध्यक्षता डॉ. अरुण राय ने की।

विशेषज्ञों ने भारत सहित विभिन्न लोकतांत्रिक देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों, ऑनलाइन पंजीकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।

महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं की चुनौतियों पर चर्चा

छठे तकनीकी सत्र का विषय “Voter Registration and Voter Register: Gender and Migrant Issues” रहा। इसकी अध्यक्षता डॉ. चार्वाक पति और सह-अध्यक्षता डॉ. हनी राज ने की।

सत्र में ग्रामीण और वंचित समुदायों, प्रवासी आबादी एवं श्रमिकों तथा जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मतदाता पंजीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। महिलाओं की निर्वाचन भागीदारी और निर्वाचन समावेशन को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।

NUSRL में बनाए गए विशेष तकनीकी सत्र कक्ष

सम्मेलन के समानांतर तकनीकी सत्रों के आयोजन के लिए NUSRL के तीन कक्षों और लेक्चर थिएटरों को विशेष रूप से तैयार किया गया था। नॉलेज पार्टनर संस्थानों के प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और छात्र स्वयंसेवकों ने सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी की।

विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने अकादमिक चर्चाओं में हिस्सा लेने के साथ सम्मेलन के सुचारु संचालन में भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

देश-विदेश के विशेषज्ञों को किया गया आमंत्रित

सम्मेलन की मुख्य थीम “Voter Registration and Voter Registers” को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

इन विशेषज्ञों को तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता करने के साथ अपने शोध, अनुभव और अकादमिक दृष्टिकोण साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। सम्मेलन में बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम, प्रो. प्रतिमा सारंगी, डॉ. वी. विजयकुमार, डॉ. महेश देबता, प्रो. सतीश कुमार सिंह, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. सुधीर कुमार सिंह, प्रो. ईशान नस्कर, श्री चैतन्य प्रसाद समेत कई शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही।

इसके अलावा प्रो. राहुल वर्मा, प्रो. रेखा सक्सेना, प्रो. संदीप शास्त्री, प्रो. ए.के. वर्मा, डॉ. स्वपन के. बिस्वास, श्री शिव प्रसाद शर्मा, श्री एस.के. सेठिया और डॉ. हरि चरण बेहारा सहित कई विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखे।

निर्वाचन विभाग के अधिकारी और शिक्षाविद रहे मौजूद

कार्यक्रम में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह समेत निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा शिक्षाविद्, शोधकर्ता, विद्यार्थी, छात्र स्वयंसेवक, राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड के पदाधिकारी और कर्मियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।

मतदाता पंजीकरण को मजबूत बनाने पर रहा फोकस

सम्मेलन के पहले दिन की चर्चाओं में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि मजबूत लोकतंत्र के लिए सटीक मतदाता सूची, आसान पंजीकरण प्रक्रिया और अधिकतम निर्वाचन भागीदारी बेहद जरूरी है। तकनीक, सोशल मीडिया और AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ महिलाओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ना भी आने वाले समय की महत्वपूर्ण चुनौती और प्राथमिकता होगी।

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