About News Box Bharat

News Box Bharat
News Box Bharat brings you the latest Hindi news, breaking news, and Jharkhand news, covering politics, business, sports, entertainment, and important national updates. Our mission is to keep you informed with timely news and reliable information.

Recent Posts

+91 6205-216-893 mailnewsboxbharat@gmail.com
Sunday, October 18, 2026
स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट श्रीहरिकोटा से सफल ऑर्बिटल लॉन्च के दौरान
स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट ने सफल ऑर्बिटल लॉन्च कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर में नया इतिहास रच दिया।
EducationNewstechnology

भारत ने रचा नया स्पेस इतिहास: स्काईरूट का विक्रम-1 सफल, अब सैटेलाइट लॉन्च करना होगा ‘कैब बुक’ जितना आसान

Share the post

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने शनिवार को अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां निजी कंपनियां भी रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) तक पहुंचाने में सक्षम हैं।

दोपहर 12:05 बजे श्रीहरिकोटा स्थित इसरो (ISRO) के लॉन्च सेंटर से उड़ान भरने वाला सात मंजिला विक्रम-1 रॉकेट करीब 16 मिनट में 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सफलतापूर्वक पहुंच गया। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा करते हुए लिखा, “विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 ने ऑर्बिट हासिल कर लिया… इतिहास रचा गया।”

‘कैब टू ऑर्बिट’ का सपना हुआ साकार

स्काईरूट एयरोस्पेस का उद्देश्य अंतरिक्ष तक पहुंच को आसान और किफायती बनाना है। कंपनी इसे “Cab to Orbit” मॉडल कहती है।

कंपनी के सह-संस्थापक और CEO पवन कुमार चंदना के अनुसार, अभी सैटेलाइट ऑपरेटरों को लॉन्च के लिए कई महीनों या वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। स्काईरूट छोटे सैटेलाइट्स के लिए डेडिकेटेड लॉन्च सेवा उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसी स्थान पर जाने के लिए ट्रेन का इंतजार करने के बजाय लोग कैब बुक करते हैं, उसी तरह भविष्य में कंपनियां अपने सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए स्काईरूट की सेवा ले सकेंगी।

350 किलोग्राम तक ले जा सकता है पेलोड

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर बने विक्रम-1 रॉकेट की क्षमता लगभग 350 किलोग्राम पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचाने की है।

यह मॉडल दुनिया की प्रसिद्ध अमेरिकी कंपनी Rocket Lab की तरह छोटे सैटेलाइट लॉन्च बाजार को लक्ष्य बनाता है।

छह पेलोड लेकर पहुंचा अंतरिक्ष

“आगमन” नाम के इस परीक्षण मिशन के तहत विक्रम-1 ने कुल छह पेलोड अंतरिक्ष में पहुंचाए।

इनमें शामिल हैं—

  • स्पेस डेब्री हटाने वाला रोबोटिक आर्म
  • अर्थ ऑब्जर्वेशन कैमरा
  • जर्मन कंपनी का सैटेलाइट
  • अन्य तकनीकी प्रयोग

हालांकि सबसे अधिक चर्चा दो भारतीय प्रतीकात्मक पेलोड की रही।

अंतरिक्ष में पहुंचा डायमंड का कमल

इस मिशन में Cosmic Bloom नाम का लैब-ग्रोन डायमंड से बना कमल भी भेजा गया।

इसे Cosmos Diamonds ने तैयार किया है। यह अंतरिक्ष अन्वेषण और भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों को समर्पित एक प्रतीकात्मक कला कृति है।

तीन महान वैज्ञानिकों को अनोखी श्रद्धांजलि

रॉकेट के साथ चावल के दाने से भी छोटे एक स्वर्ण रॉकेट में भारत के तीन महान वैज्ञानिकों की सूक्ष्म प्रतिमाएं भी भेजी गईं।

इनमें शामिल हैं—

  • नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रामन
  • पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई

स्काईरूट के CEO पवन चंदना ने कहा कि कंपनी इन्हीं महान वैज्ञानिकों की विरासत पर आगे बढ़ रही है और यह मिशन उन्हें समर्पित है।

अगले साल से शुरू होंगे कमर्शियल लॉन्च

स्काईरूट ने बताया कि यह इस वर्ष की दो परीक्षण उड़ानों में पहली है। कंपनी 2027 से व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है।

हैदराबाद स्थित उसकी फैक्ट्री में हर महीने एक रॉकेट तैयार करने की क्षमता विकसित की जा रही है।

2018 में शुरू हुआ था सफर

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में पूर्व ISRO वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भारथ डाका ने की थी।

भारत सरकार द्वारा 2020 में निजी क्षेत्र के लिए स्पेस सेक्टर खोलने के बाद देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सामने आए, लेकिन स्काईरूट आज भारत की पहली और एकमात्र स्पेस टेक यूनिकॉर्न बन चुकी है।

कंपनी ने 2022 में भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर भी इतिहास बनाया था।

भारत की स्पेस इकोनॉमी को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी रॉकेट लॉन्च सेवाओं से भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

इन सेवाओं का उपयोग भविष्य में—

  • कृषि
  • मत्स्य पालन
  • मौसम पूर्वानुमान
  • आपदा प्रबंधन
  • संचार
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी
  • नेविगेशन
  • राष्ट्रीय सुरक्षा

जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा।

भारत पहले ही चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसी सफल परियोजनाओं से दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। अब निजी कंपनियों की भागीदारी देश को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में और मजबूत बनाएगी।

👉 यह भी पढ़ें:

  • अब नहीं फटेंगे ₹10 और ₹20 के नोट! RBI की नई पॉलिमर नोट योजना क्या है, जानिए पूरी जानकारी
  • रोहित शर्मा का अंत या नई शुरुआत? अब उनके करियर का अगला अध्याय कैसा होगा
  • NEET UG 2026: रांची के आकाश के 27 छात्रों ने मारी बाजी, पायल मंडल ने हासिल की AIR 666

Leave a Response