
डेस्क। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों की व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में सभी निजी स्कूलों के प्राचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को आर्यभट्ट हॉल, मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय परिसर में दोपहर 1 बजे से शुरू होगी। जिला प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्यों की उपस्थिति अनिवार्य की है।
फीस संरचना और समिति पर रहेगा फोकस
बैठक में जिला स्तर पर गठित शुल्क समिति की संरचना, कार्यप्रणाली और निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण एवं वृद्धि के नियमों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों द्वारा फीस में मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगे और अभिभावकों को पारदर्शी जानकारी मिले। हाल ही में गठित शुल्क समिति ने निजी स्कूलों के लिए फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत तय करने और पारदर्शी शुल्क संरचना लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
शिकायत निवारण प्रणाली को बनाया जाएगा मजबूत
बैठक में अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाए गए ग्रिवेंस रिड्रेसल सेल (Grievance Redressal Cell) की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निपटारा हो सके।
RTE के तहत 25% सीटों पर जोर
बैठक का एक अहम एजेंडा Right to Education Act 2009 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। इसके तहत निजी विद्यालयों को प्रारंभिक कक्षाओं (नर्सरी से कक्षा 1 तक) में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। प्रशासन इस बात पर जोर देगा कि सभी स्कूल इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं और योग्य छात्रों का नामांकन सुनिश्चित करें।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने सभी निजी विद्यालय प्रबंधन से अपील की है कि वे बैठक में पूर्ण सहयोग करें और RTE के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम
यह बैठक स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जिला प्रशासन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, फीस नियंत्रण सुनिश्चित करने और अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर है। नए शैक्षणिक सत्र में यह पहल स्कूलों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।





