सुकेश चंद्रशेखर को 8 साल की जेल। सुप्रीम कोर्ट जज बनकर जमानत दिलाने की कोशिश का मामला

ठगी के मामलों में चर्चित सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की अदालत ने 8 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। मामला 2017 का है, जब सुकेश ने कथित तौर पर खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर एक न्यायिक अधिकारी को फोन किया और अपने खिलाफ चल रहे मामले में जमानत दिलाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी।
जज बनकर किया था फोन
अदालत के मुताबिक, 28 अप्रैल 2017 को पुलिस हिरासत में रहते हुए सुकेश ने एक पुलिसकर्मी के फोन का इस्तेमाल कर उस समय भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई कर रहीं विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी से संपर्क किया था। उसने पहले सुप्रीम कोर्ट के जज के निजी सचिव और बाद में खुद जज होने का दावा किया।
उसका मकसद अपने खिलाफ चल रहे मामले में जमानत की कार्यवाही को प्रभावित करना था। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला गंभीर अपराध माना।
तीन धाराओं में मिली सजा
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा ने अलग-अलग अपराधों के लिए सजा सुनाई:
- IPC की धारा 170: सरकारी कर्मचारी का रूप धारण करने के लिए 2 साल की कठोर कैद
- IPC की धारा 189: सरकारी कर्मचारी को धमकी देने के लिए 2 साल की कठोर कैद
- IPC की धारा 507: गुमनाम संचार के जरिए आपराधिक धमकी के लिए 4 साल की कठोर कैद
अदालत ने इन सजाओं को एक साथ चलाने के बजाय लगातार चलाने का आदेश दिया, जिससे कुल सजा 8 साल हुई।
अदालत ने क्यों माना गंभीर अपराध?
अदालत ने कहा कि यह महज किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने का मामला नहीं था। सुकेश ने न्यायपालिका के नाम और अधिकार का इस्तेमाल करके न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। अदालत के अनुसार यह न्याय व्यवस्था की बुनियाद पर हमला करने जैसा गंभीर कृत्य था।
सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट के जज की पहचान का इस्तेमाल कर जमानत की कार्यवाही प्रभावित करने के मामले में 8 साल की कठोर कैद मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को डराने, धमकाने या फर्जी पहचान के जरिए प्रभावित करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।
👉 यह भी पढ़ें:





