Elitecon International Share Crash: ₹422 से ₹13 पर आया शेयर, SEBI कार्रवाई के बाद निवेशकों को बड़ा झटका

कभी ₹400 के पार पहुंचा Elitecon International का शेयर अब ₹15 से नीचे आ चुका है। 25 अगस्त 2025 को इस शेयर ने ₹422.65 का 52-वीक हाई बनाया था, जबकि 25 अगस्त 2026 को यह गिरकर ₹13.73 के 52-वीक लो तक पहुंच गया। यानी करीब एक साल में शेयर की कीमत में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। 25 अगस्त को शेयर ₹13.76 पर बंद हुआ था।
तंबाकू उत्पादों के कारोबार से जुड़ी इस कंपनी को लेकर निवेशकों की चिंता सिर्फ शेयर की गिरती कीमत तक सीमित नहीं है। मार्च 2026 में SEBI ने कंपनी और उसके प्रमोटर समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया था। नियामक ने कथित तौर पर शेयर प्राइस और वॉल्यूम में हेरफेर, भ्रामक खुलासों और अन्य अनियमितताओं की जांच की।
₹422 से ₹13 तक कैसे पहुंचा शेयर?
Elitecon International के शेयर ने अगस्त 2025 में ₹422.65 का 52-वीक हाई छुआ था। इसके बाद शेयर में तेज गिरावट का दौर शुरू हुआ और अगस्त 2026 तक यह ₹14 के आसपास आ गया।
25 अगस्त 2026 को शेयर का लो ₹13.73 रहा और बंद भाव ₹13.76 था। इस स्तर पर शेयर अपने एक साल पुराने हाई से करीब 97 फीसदी नीचे है।
यानी जिस निवेशक ने शेयर को उसके हाई के आसपास खरीदा था, उसके निवेश की वैल्यू में बहुत बड़ी गिरावट आई है।
SEBI की कार्रवाई ने बढ़ाई मुश्किल
इस मामले का सबसे अहम मोड़ मार्च 2026 में आया। SEBI ने 30 मार्च 2026 को Elitecon International के मामले में ex-parte interim order जारी किया।
नियामक ने कंपनी, प्रमोटर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन शर्मा और कुछ अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। SEBI की जांच में शेयर प्राइस और वॉल्यूम में कथित हेरफेर, कंपनी की ओर से कथित देरी या गैर-खुलासे और कुछ कथित भ्रामक disclosures जैसे मुद्दों की जांच की गई।
SEBI के मुताबिक, कथित तौर पर करीब ₹51.26 करोड़ के अवैध लाभ को impound किया गया और संबंधित पक्षों पर सिक्योरिटीज मार्केट में कारोबार से प्रतिबंध लगाया गया।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि ये SEBI के अंतरिम आदेश में लगाए गए prima facie निष्कर्ष और आरोप हैं, इन्हें अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
₹875 करोड़ का ऑर्डर भी चर्चा में क्यों?
Elitecon के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा आंकड़ा USD 97.35 मिलियन यानी करीब ₹875 करोड़ का लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट है।
यह कॉन्ट्रैक्ट Yuvi International Trade FZE से जुड़ा है और इसमें सिगरेट, प्रीमिक्स शीशा, हुक्का तंबाकू, स्मोकिंग मिक्सचर और अन्य तंबाकू उत्पादों की सप्लाई शामिल है। यह कॉन्ट्रैक्ट 15 दिसंबर 2025 को घोषित किया गया था और इसका execution 2026 में जारी है।
कंपनी के मुताबिक यह ऑर्डर उसके मिडिल ईस्ट कारोबार और एक्सपोर्ट विजिबिलिटी को मजबूत कर सकता है।
लेकिन इस ऑर्डर को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात है।
SEBI ने इसी ऑर्डर पर भी उठाए थे सवाल
SEBI के मार्च 2026 के interim order में 15 दिसंबर 2025 को घोषित इसी USD 97.35 मिलियन के Yuvi contract का उल्लेख किया गया है।
नियामक ने अपने आदेश में इस disclosure की जांच की और कुछ परिस्थितियों को लेकर prima facie सवाल उठाए। आदेश में Yuvi की वेबसाइट पर तंबाकू कारोबार से संबंधित जानकारी नहीं मिलने और contract disclosure की timing समेत कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। SEBI ने यह भी कहा कि उसे इस disclosure के संबंध में आगे स्पष्टीकरण की जरूरत थी।
इसलिए सिर्फ ₹875 करोड़ के ऑर्डर को शेयर के लिए पूरी तरह सकारात्मक संकेत मान लेना सही नहीं होगा। निवेशकों को इस मामले में कंपनी की आगे की regulatory disclosures और SEBI की प्रक्रिया पर नजर रखनी होगी।
कंपनी अब क्या कर रही है?
SEBI विवाद के बीच कंपनी ने अपने कारोबार को मजबूत करने और नए सेगमेंट में विस्तार की योजना भी पेश की है।
Elitecon ने करीब ₹700 करोड़ के FMCG expansion roadmap की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य FY2030 तक करीब ₹20,000 करोड़ का revenue हासिल करना है।
योजना में packaged foods, snacks, edible oils और household essentials जैसे FMCG क्षेत्रों में विस्तार शामिल है। कंपनी ने 5,000 distribution partners और 5 लाख से अधिक retail outlets तक पहुंच बनाने की महत्वाकांक्षा भी बताई है।
कंपनी के मुताबिक उसके पास Africa और Middle East में USD 119 मिलियन से ज्यादा का contracted tobacco order book है, जिसमें Yuvi का USD 97.35 मिलियन वाला ऑर्डर भी शामिल है।
क्या शेयर में अब तेजी आएगी?
यह सवाल निवेशकों के लिए सबसे अहम है, लेकिन सिर्फ ऑर्डर और कंपनी की expansion plans देखकर इसका जवाब देना मुश्किल है।
शेयर अभी अपने 52-वीक लो के आसपास है और कंपनी पर SEBI की regulatory कार्रवाई का असर भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, disclosures और regulatory proceedings को लेकर आगे आने वाली जानकारी शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
25 अगस्त 2026 के बंद भाव ₹13.76 और 52-वीक हाई ₹422.65 की तुलना करें तो शेयर में करीब 97 फीसदी की गिरावट हो चुकी है।
निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी है?
Elitecon International की कहानी यह दिखाती है कि स्मॉल-कैप शेयरों में सिर्फ तेजी से बढ़ती कीमत या बड़े ऑर्डर देखकर निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
इस मामले में एक तरफ कंपनी के पास बड़े export orders और FMCG expansion की योजना है, तो दूसरी तरफ SEBI की गंभीर regulatory proceedings भी चल रही हैं।
इसलिए ₹13-15 के आसपास का भाव सस्ता दिख रहा है, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि शेयर सुरक्षित या undervalued ही हो।
निवेशकों को कंपनी की आधिकारिक filings, SEBI की आगे की कार्रवाई, वित्तीय नतीजों और कारोबार की वास्तविक प्रगति को देखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।
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