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Monday, October 26, 2026
उच्च शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की तस्वीर के साथ छात्र प्रदर्शन का रचनात्मक न्यूज़ थंबनेल, जो उनकी नियुक्ति और उससे जुड़े विवाद को दर्शाता है।
नरेश पाल गंगवार बने नए उच्च शिक्षा सचिव, लेकिन नियुक्ति के साथ पुराने सब्सिडी विवाद ने भी फिर पकड़ ली सुर्खियां।
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नरेश पाल गंगवार कौन हैं? नए उच्च शिक्षा सचिव की नियुक्ति और सब्सिडी विवाद की पूरी कहानी

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केंद्र सरकार ने 1994 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) का नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब देश में कथित NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र आंदोलन जारी हैं। इसी कारण उनकी नियुक्ति राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।

नई जिम्मेदारी

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आदेश के अनुसार नरेश पाल गंगवार अब शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव होंगे। उन्होंने इस पद पर विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है। नियुक्ति केंद्र सरकार के व्यापक सचिव-स्तरीय फेरबदल का हिस्सा है।

नरेश पाल गंगवार का प्रशासनिक करियर

नरेश पाल गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी हैं। नई नियुक्ति से पहले वे पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry & Dairying) में सचिव के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board) सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

क्या है 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी का विवाद?

नरेश पाल गंगवार का नाम जून 2026 में सामने आए एक विवाद के कारण भी चर्चा में रहा। एक मीडिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में उनकी तैनाती के दौरान उनके परिवार के सदस्यों—पत्नी, बेटे और मां—को संरक्षित खेती (Protected Cultivation Scheme) के तहत कुल लगभग 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली।

रिपोर्ट के अनुसार यह सब्सिडी राजस्थान में खीरे (Cucumber) की संरक्षित खेती के लिए स्वीकृत हुई थी।

गंगवार का पक्ष क्या है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नरेश पाल गंगवार ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। उनका कहना है कि लाभार्थियों ने योजना के नियमों के तहत आवेदन किया था और संबंधित जानकारी का उल्लेख उन्होंने अपनी संपत्ति संबंधी विवरण (Property Returns) में भी किया था। फिलहाल इस मामले में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

नियुक्ति पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब शिक्षा मंत्रालय NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा पारदर्शिता और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पहले से दबाव में है। ऐसे संवेदनशील समय में सब्सिडी विवाद से जुड़े अधिकारी को उच्च शिक्षा सचिव बनाए जाने पर विपक्ष और सोशल मीडिया के कुछ वर्गों ने सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने नियुक्ति के पीछे कोई विशेष कारण सार्वजनिक नहीं किया है।

आगे उनके सामने क्या चुनौतियां होंगी?

उच्च शिक्षा सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में भरोसा बहाल करना।
  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार लागू करना।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) से जुड़े लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना।
  • विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक सुधारों को गति देना।

नरेश पाल गंगवार एक अनुभवी IAS अधिकारी हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, उनके परिवार से जुड़े 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी के आरोपों के कारण उनकी नियुक्ति विवादों में है। अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक दोष सिद्ध नहीं हुआ है और न ही सरकार ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष जारी किया है। ऐसे में यह मामला प्रशासनिक नियुक्ति के साथ-साथ सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की बहस का भी हिस्सा बन गया है।

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