धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहले चाहिए: NEET पर चर्चा से पहले विपक्ष की शर्त, सरकार बोली- बहस को तैयार

संसद के मानसून सत्र में NEET पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि उनके पद पर रहते हुए NEET मामले पर निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं है। वहीं केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर संसद में पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है।
विपक्ष ने रखी इस्तीफे की शर्त
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यदि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर निष्पक्ष चर्चा करनी है, तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूरे विपक्ष की यही मांग है और बिना इस्तीफे के इस मुद्दे पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है।
सरकार का जवाब
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार संसद सत्र की शुरुआत से ही NEET समेत सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से नहीं भाग रही, बल्कि विपक्ष ही बहस से बचने की कोशिश कर रहा है।
वहीं जेपी नड्डा और सदन के नेता रामनाथ कोविंद ने भी कहा कि सरकार NEET पेपर लीक समेत सभी संबंधित मामलों पर खुली और विस्तृत चर्चा के पक्ष में है।
अखिलेश यादव ने भी दोहराई मांग
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की पहली मांग इस्तीफा है और उसके बाद ही संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
उनके अनुसार, यदि सरकार इस्तीफे का आश्वासन देती है तो विपक्ष बहस में भाग लेने को तैयार होगा।
NEET पेपर लीक पर लगातार जारी है विरोध
NEET पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। विभिन्न छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। कई स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।
फिलहाल क्या स्थिति है?
संसद में NEET पेपर लीक पर चर्चा को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि वह बिना किसी शर्त के चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बहस की पूर्व शर्त बना रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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