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Tuesday, October 27, 2026
असम में आई भीषण बाढ़ के बाद पानी और कीचड़ में डूबे वाहन तथा तबाह घरों का दृश्य
असम के कई जिलों में भीषण बाढ़ के बाद तबाही का मंजर, कई वाहन और घर पानी व कीचड़ में दबे।
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असम के तीन जिलों पर बाढ़ का सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ा? जानिए इसकी बड़ी वजह

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असम में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। चराईदेव (Charaideo), जोरहाट (Jorhat) और शिवसागर (Sivasagar) जैसे जिले, जो पहले गंभीर बाढ़ से काफी हद तक सुरक्षित माने जाते थे, इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। असम सरकार ने 23 जुलाई 2026 को विधानसभा में बताया कि इन इलाकों में पिछले 60 वर्षों की सबसे गंभीर बाढ़ देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब बाढ़ का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

असम में बाढ़ बार-बार क्यों आती है?

असम की भौगोलिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी वजह है। राज्य ब्रह्मपुत्र और बराक घाटियों में फैला हुआ है, जिसके चारों ओर पहाड़ी राज्य हैं। अरुणाचल प्रदेश, भूटान और आसपास के ऊंचे इलाकों में तेज बारिश होने पर बड़ी मात्रा में पानी असम की ओर आता है। घाटियों के निकास (आउटलेट) संकरे होने के कारण पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पाता और बाढ़ की स्थिति बन जाती है।

ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियों की बड़ी भूमिका

ब्रह्मपुत्र और बराक नदी की लगभग 120 सहायक नदियां हैं। ये नदियां पहाड़ों से भारी मात्रा में मिट्टी और तलछट (Sediment) लेकर आती हैं। समय के साथ नदी का तल ऊंचा होता जाता है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता कम हो जाती है और थोड़ी अधिक बारिश में भी पानी आसपास के इलाकों में फैल जाता है।

इस बार चराईदेव, जोरहाट और शिवसागर में हालात क्यों बिगड़े?

इस बार इन जिलों में सामान्य मानसूनी बारिश के साथ लगातार भारी वर्षा और अचानक आए फ्लैश फ्लड ने स्थिति को गंभीर बना दिया। कई गांव पानी में डूब गए, घर क्षतिग्रस्त हुए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतनी बड़ी बाढ़ नहीं देखी थी।

जलवायु परिवर्तन बना नई चुनौती

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले जहां कुछ इलाके अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे, अब वहां भी अत्यधिक बारिश और फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे अब “नई सामान्य स्थिति” (New Normal) माना जा रहा है।

अन्य कारण भी बढ़ा रहे हैं खतरा

बाढ़ की गंभीरता बढ़ाने में कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं।

  • अप्रैल और मई में होने वाली असामान्य भारी बारिश।
  • भूकंप और भूस्खलन के कारण नदियों में बढ़ती तलछट।
  • जंगलों की कटाई और नदी किनारे अतिक्रमण।
  • वेटलैंड्स का लगातार कम होना।
  • पुराने तटबंधों (Embankments) की कमजोरी और रखरखाव की कमी।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बाढ़ का विस्तार

यूरोपीय संघ के Copernicus Programme और Indian Institute for Human Settlements के Global Flood Mapper जैसे सैटेलाइट टूल्स ने भी इस बार बाढ़ के बड़े दायरे की पुष्टि की है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बाढ़ का प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक रहा।

असम के लोग लंबे समय से बाढ़ के साथ जीवन जीते आए हैं, लेकिन बदलती जलवायु ने अब नए क्षेत्रों को भी खतरे में डाल दिया है। भविष्य में नुकसान कम करने के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान, मजबूत बाढ़ सुरक्षा ढांचा, वेटलैंड संरक्षण और जलवायु अनुकूलन पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है।

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