CJP का दावा: युवा प्रदर्शन और NEET से जुड़े तीन सवाल लोकसभा में हुए खारिज

Cockroach Janta Party (CJP) ने दावा किया है कि हाल ही में समाप्त हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान युवा प्रदर्शन, NEET-UG 2026 और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर पूछे गए तीन sets of questions को लोकसभा में स्वीकार नहीं किया गया। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने इसे लेकर संसद में जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
किन मुद्दों पर पूछे गए थे सवाल?
CJP के अनुसार, DMK सांसद Matheswaran V.S. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े तीन sets of questions के जरिए जानकारी मांगी थी। इनमें NEET-UG 2026 की application fee refund, पेपर लीक, छात्र कल्याण, शिक्षा सुधार और युवा प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
सौरव दास ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर पेयजल और सैनिटेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवाल भी इन मुद्दों में शामिल थे।
Rule 41(2) का दिया गया हवाला
रिपोर्टों के अनुसार, सवालों को Lok Sabha Rule 41(2) की अलग-अलग धाराओं के तहत disallow किया गया। इनमें ऐसे सवालों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं जो बहुत सामान्य हों, आरोप या राय मांगते हों अथवा न्यायिक या संसदीय समिति के विचाराधीन मामलों से संबंधित हों।
सांसद Matheswaran ने सवालों के disallow होने की पुष्टि की और बताया कि उन्हें इसकी जानकारी लोकसभा सदस्यों के पोर्टल के जरिए मिली।
CJP ने उठाया संसद में जवाबदेही का सवाल
CJP नेता सौरव दास ने सवाल उठाया कि अगर ऐसे मुद्दों पर संसद में सवाल नहीं पूछे जा सकते तो सरकार की जवाबदेही किस मंच पर तय होगी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगे जाने की बात कही।
हालांकि, CJP का यह आरोप कि सवाल केंद्र सरकार के कहने पर disallow किए गए, एक राजनीतिक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टों में सवालों को नियमों के तहत स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
NEET विवाद से जुड़ा है मामला
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब NEET-UG 2026 और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर संसद में भी राजनीतिक बहस हुई। CJP के नेतृत्व में छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, परीक्षा सुधार और शिक्षा मंत्री से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय तक प्रदर्शन किया था।
CJP का कहना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। वहीं सवालों को disallow किए जाने का आधार लोकसभा के निर्धारित नियमों से जुड़ा बताया गया है।
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