ईरान-ओमान में हो गया बड़ा समझौता? होरमुज से फिर शुरू होगी शिपिंग, ट्रंप पर टिकी दुनिया की नजर

नई दिल्ली: ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होरमुज से जुड़ी शिपिंग व्यवस्था को लेकर बड़ा समझौता सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों देशों के बीच समुद्री मार्ग को लेकर सहमति बनी है। इस घटनाक्रम पर अब अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर है।
क्या है ईरान-ओमान का समझौता?
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद होरमुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए एक व्यवस्थित मार्ग तैयार करना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस व्यवस्था में शिपिंग रूट और उससे जुड़े शुल्क की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई है।
होरमुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है। इसलिए इस रास्ते में लंबे समय तक रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ट्रंप के लिए क्यों अहम है मामला?
होरमुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और समुद्री नाकेबंदी जारी रखने की बात कही है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका को अपनी नाकेबंदी और सैन्य दबाव कम करना होगा।
ट्रंप पहले ही होरमुज पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा कर चुके हैं। ऐसे में ईरान और ओमान की किसी स्वतंत्र शिपिंग व्यवस्था को लेकर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी।
होरमुज से शिपिंग क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होरमुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है।
लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर से काफी नीचे आ गई है। रॉयटर्स के अनुसार, अगस्त में कई दिनों में यहां से रोजाना केवल कुछ ही व्यावसायिक जहाज गुजर रहे हैं, जबकि संघर्ष से पहले यह संख्या करीब 130-140 जहाज प्रतिदिन थी।
तेल की कीमतों पर भी पड़ेगा असर
होरमुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होने का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से एशिया और यूरोप समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका-ईरान बातचीत में गतिरोध के बीच होरमुज से जुड़ा कोई समझौता बाजार के लिए राहत की खबर हो सकता है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि व्यावसायिक शिपिंग पूरी तरह कब सामान्य होगी।
अब आगे क्या होगा?
ईरान-ओमान समझौते के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका इसे स्वीकार करेगा और क्या होरमुज से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग वास्तव में सामान्य हो पाएगी?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अटकी हुई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दबाव बनाए हुए हैं। इसलिए आने वाले दिनों में होरमुज की स्थिति वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
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