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Thursday, October 29, 2026
अभिनेत्री सुकन्या की तस्वीर।
30 साल पुराने मानहानि मामले में अभिनेत्री सुकन्या को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली।
Entertainment

30 साल बाद अभिनेत्री सुकन्या को मिली बड़ी जीत, मानहानि मामले में कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

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वीरप्पन इंटरव्यू विवाद में अभिनेत्री सुकन्या के पक्ष में आया फैसला

करीब 30 साल पुराने मानहानि मामले में तमिल फिल्म अभिनेत्री सुकन्या को बड़ी कानूनी जीत मिली है। मद्रास हाई कोर्ट ने सन टीवी नेटवर्क की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें अभिनेत्री को 10 लाख रुपये से अधिक का हर्जाना देने का आदेश दिया गया था। यह मामला कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन के एक इंटरव्यू के प्रसारण से जुड़ा हुआ था।

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी, जब वीरप्पन का एक इंटरव्यू टेलीविजन पर प्रसारित किया गया था। इंटरव्यू के दौरान अभिनेत्री सुकन्या के बारे में कुछ ऐसे दावे किए गए थे, जिन्हें उन्होंने झूठा, अपमानजनक और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था।

सुकन्या ने आरोप लगाया था कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए इन टिप्पणियों का प्रसारण किया गया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई। इसके बाद उन्होंने सन टीवी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी मीडिया संस्थान की जिम्मेदारी है कि वह प्रसारण से पहले सामग्री की जांच और सत्यापन करे। अदालत ने माना कि चैनल के पास इंटरव्यू के विवादित हिस्सों को संपादित करने का अवसर था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के बयान का प्रसारण कर देना मीडिया संस्थान को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। यदि प्रसारित सामग्री किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है, तो प्रसारक की जवाबदेही भी तय होगी।

निचली अदालत का फैसला भी बरकरार

इस मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2015 में अभिनेत्री सुकन्या के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 10 लाख रुपये से अधिक का हर्जाना देने का आदेश दिया था। सन टीवी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अब हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है।

सुकन्या के लिए बड़ी राहत

करीब तीन दशक तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला अभिनेत्री सुकन्या के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यह निर्णय उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली गलत सूचनाओं के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते हैं।

मीडिया की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण संदेश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मीडिया संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि समाचार या इंटरव्यू के नाम पर किसी व्यक्ति के बारे में अप्रमाणित और मानहानिकारक सामग्री का प्रसारण नहीं किया जा सकता।

वीरप्पन इंटरव्यू विवाद से जुड़े इस चर्चित मानहानि मामले में मद्रास हाई कोर्ट का फैसला मीडिया की जिम्मेदारी और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। 30 वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अभिनेत्री सुकन्या को न्याय मिलने से यह मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन गया है।

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