राजस्थान: 13 साल तक सर्जरी का इंतजार, AIIMS में तन्वी की मौत के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की दिल्ली के AIIMS में मौत के बाद इलाज और सर्जरी में कथित देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तन्वी के माता-पिता का आरोप है कि उनकी बेटी करीब 13 साल तक इलाज और ऑपरेशन की उम्मीद में AIIMS के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसे बार-बार तारीख मिलती रही और सर्जरी नहीं हो सकी। परिवार का कहना है कि अगर समय पर ऑपरेशन हो जाता तो शायद तन्वी की जान बच सकती थी।
दो साल की उम्र से चल रहा था इलाज
परिवार के मुताबिक तन्वी को बचपन से ही दिल की गंभीर बीमारी थी। वर्ष 2012 में उसे इलाज के लिए दिल्ली AIIMS लाया गया था। इसके बाद कई वर्षों तक परिवार अस्पताल के चक्कर लगाता रहा।
तन्वी के पिता मुकेश कुमार का दावा है कि एक समय ऑपरेशन के लिए अस्पताल में करीब सवा लाख रुपये जमा भी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद सर्जरी आगे नहीं बढ़ सकी। परिवार का कहना है कि उन्हें अलग-अलग मौकों पर ऑपरेशन होने की उम्मीद दी गई, जिसके चलते वे AIIMS पर भरोसा करते रहे।
परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य मंत्रालय तक लगाई गुहार
तन्वी के पिता के अनुसार, ऑपरेशन में देरी को लेकर उन्होंने कई स्तरों पर शिकायत की। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भी अपनी बेटी के इलाज के लिए हस्तक्षेप की गुहार लगाई। परिवार का दावा है कि कोटा के सांसद ओम बिरला से भी उन्होंने मदद मांगी थी।
परिजनों का आरोप है कि तमाम कोशिशों के बावजूद तन्वी की सर्जरी नहीं हो सकी और आखिरकार उसकी हालत बिगड़ गई।
AIIMS ने क्या कहा?
तन्वी के परिवार के आरोपों के बाद AIIMS ने भी अपना पक्ष रखा है। अस्पताल के मुताबिक, तन्वी को जन्मजात हृदय रोग था और उसकी कई बार विशेषज्ञों ने जांच की थी।
AIIMS का कहना है कि मेडिकल जांच के आधार पर एक समय यह निष्कर्ष निकाला गया था कि तत्काल सर्जरी करना संभव नहीं था। इसके बाद उसे दवाओं और नियमित फॉलोअप के जरिए इलाज की सलाह दी गई। अस्पताल के अनुसार, बाद में तन्वी के मामले में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया गया।
इलाज के दौरान बिगड़ी तबीयत
अगस्त 2026 में तन्वी की हालत बिगड़ने के बाद उसे AIIMS में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उसकी जांच की गई और ट्रांसप्लांट की संभावनाओं का मूल्यांकन शुरू हुआ।
AIIMS के मुताबिक, इलाज के दौरान तन्वी को गंभीर हाइपोक्सिक अटैक आया और इसके बाद कार्डियक अरेस्ट हुआ। डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मौत के बाद AIIMS ने बनाई जांच कमेटी
मामले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच AIIMS ने तन्वी के इलाज और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा के लिए एक जांच समिति गठित की है। समिति यह देखेगी कि तन्वी के इलाज के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई और उसकी मेडिकल स्थिति के हिसाब से लिए गए फैसलों में कोई कमी थी या नहीं।
वहीं, परिवार जांच कमेटी से संतुष्ट नहीं है। परिजनों ने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
13 साल का इंतजार छोड़ गया कई सवाल
तन्वी की मौत ने सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा, मरीजों को मिलने वाली तारीखों और मेडिकल फैसलों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, क्या इलाज में वास्तव में लापरवाही हुई या तन्वी की जटिल बीमारी के कारण सर्जरी जोखिम भरी थी, इसका स्पष्ट निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
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